देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) ने 1970 से 2024 तक के 52 कोर्स की 1.38 करोड़ मार्कशीट का रिकॉर्ड डिजिटल कर दिया है, जिससे यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। इस पहल से विद्यार्थियों को डुप्लीकेट मार्कशीट 2-3 दिन में और आपात स्थिति में 24 घंटे में मिल सकेगी। 10 सदस्यीय टीम ने सवा साल तक 23 लाख टेबुलेशन चार्ट स्कैन किए। यह अभियान 31 जुलाई 2026 को पूरा हुआ, जिसका उद्देश्य रिकॉर्ड सुरक्षा और त्वरित सेवा प्रदान करना है। कंपनियों के लिए भी मार्कशीट सत्यापन अब 24 घंटे में संभव होगा, जो पहले सप्ताहों से महीनों लेता था।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स बनाने का मामला सामने आया है। इन अनधिकृत अकाउंट्स, जिनमें डीएवीवी इंदौर 64 जैसे नाम शामिल हैं, पर प्रवेश और परीक्षा संबंधी भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस गंभीर मामले में साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें तीन-चार अकाउंट का उल्लेख है। कुलसचिव डॉ.
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन के एमएड तीसरे सेमेस्टर के छात्रों ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परीनीता रत्नपारखी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षिका ने एजुकेशन एडमिनिस्ट्रेशन विषय की कक्षाएं नहीं लीं, जिससे पाठ्यक्रम अधूरा रह गया, फिर भी उन्हें परीक्षा के लिए मजबूर किया गया। परीक्षा न देने पर छात्रों को फेल कर दिया गया। विद्यार्थियों ने कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई और कुलसचिव प्रज्वल खरे से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका दावा है कि इस विवाद से उनके यूजीसी-नेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।