बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर शहर का ट्रैफिक बदहाल है। बिना नंबर प्लेट और गलत नंबर वाली गाड़ियां सड़कों पर बेखौफ दौड़ रही हैं। पुलिस केवल ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के चालान बनाने में व्यस्त है। बीते महीनों में हूटर और सायरन लगी गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने के कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं हुआ है। इंदौर के बिगड़े ट्रैफिक से परेशान नागरिकों की याचिका पर बहस करते हुए वकील ने कोर्ट में ये तथ्य रखे।
हाई कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
इन तथ्यों पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय भी महसूस कर रहा है कि सड़कों पर कोई काम नहीं हो रहा है और ट्रैफिक की स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि चालान बनाने से कुछ नहीं होता। सड़कों पर गलत नंबर प्लेट, हूटर और बिना नंबर वाली गाड़ियां नजर आ रही हैं, और हाई कोर्ट के सामने तक ऐसी गाड़ियां देखी जाती हैं। लगातार ट्रैफिक जाम लग रहा है।
भारी वाहनों के प्रवेश पर सवाल
न्यायालय ने अधिकारियों से पूछा कि पुलिस प्रशासन ने भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर क्या किया है? जबकि सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है कि शहरों में इनकी एंट्री नहीं होनी चाहिए। शहर में ट्रैफिक की बदहाली पर लगभग आधा दर्जन याचिकाएं लगी हैं। मंगलवार को पूर्व पार्षद महेश गर्ग की याचिका पर अधिवक्ता मनीष यादव ने कोर्ट में तथ्य रखे। अधिवक्ता ने बताया कि न्यायालय ने बीते दिनों ट्रैफिक पर अलग-अलग निर्देश दिए थे, जिनका गंभीरता से पालन नहीं हुआ।
अधिकारियों के हवाई दावे और अगली सुनवाई
अधिकारी हर बार नए-नए प्रयोगों की बात कहकर, जैसे कभी एआई तकनीक तो कभी ड्रोन का इस्तेमाल, हवाई दावों से भ्रमित करते रहते हैं। न्यायालय ने आदेश दिया था कि शहर में कितने सीसीटीवी लगे हैं और कितने जवान तैनात हैं, इसकी जानकारी शपथ पत्र पर दी जाए। इसके जवाब में शासन की ओर से कोर्ट में बताया गया कि पुलिस ने 660 चौराहों पर सीसीटीवी लगा रखे हैं और सभी चौराहों पर जवानों की तैनाती भी की गई है। हालांकि, अधिवक्ता यादव और अनस मकरानी ने कहा कि प्रशासन जमीन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है और स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने 28 सितंबर वाले सप्ताह में अगली सुनवाई नियत करते हुए प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है और यह भी पूछा है कि बीते निर्देशों पर क्या कार्रवाई हुई है, उसका भी जवाब बनाकर प्रस्तुत करें।
सार्वजनिक परिवहन की स्थिति
इंदौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बदहाल है। किसी रूट पर सुविधा नहीं है, तो कहीं समय की गड़बड़ी है। अब सिर्फ ई-बसों से उम्मीद है।

