इंदौर में भूमिगत मेट्रो सुरंगों का निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू होगा। ‘क्षिप्रा’ और ‘नर्मदा’ नामक दो टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) एयरपोर्ट से बीएसएफ परिसर के बीच 22 मीटर गहराई में सुरंगें बनाएंगी। पहली टीबीएम इंदौर पहुंच चुकी है और इसे अगले 10 दिन में उतारा जाएगा। मेट्रो के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इंदौर मेट्रो की येलो लाइन 31.76 किमी लंबी है, जिसमें 12.72 किमी हिस्सा भूमिगत है। सतह पर स्थित भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय किए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11-12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ का उद्घाटन करेंगे। यह समिट सार्वजनिक परिवहन की दिशा बदलने और आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इसमें मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 पर संबोधन देंगे और पीपीपी की भूमिका पर विचार रखेंगे। समिट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता नवाचार, डिजिटल तकनीकों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन पर मंथन करेंगे।
राजधानी भोपाल में 10 दिन के ट्रायल के बाद गुरुवार से नई एयर कंडीशनंड इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया। पहले दिन दो रूटों पर चलीं 10 ई-बसों में 2 हजार से अधिक यात्रियों ने सफर किया, जिससे भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) को 25 हजार रुपए से ज्यादा का राजस्व मिला। किराया लो-फ्लोर बसों के बराबर रखा गया है। पहले चरण में भोपाल को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं, जिनमें से 21 बसें बैरागढ़ डिपो पहुंच चुकी हैं। यात्रियों ने शोर रहित और आरामदायक एसी सफर का अनुभव किया।
भोपाल में ई-बसों का वाणिज्यिक संचालन 30 जुलाई से शुरू होगा। ट्रायल रन पूरा होने के बाद पहले चरण में 10 इलेक्ट्रिक बसें दो रूटों पर चलेंगी। यात्रियों से प्रति किलोमीटर 1.50 रुपये और न्यूनतम 7 रुपये किराया लिया जाएगा। बीसीएलएल के अनुसार, 30 ई-बसें भोपाल पहुंच चुकी हैं, और निगम का लक्ष्य अगले एक महीने में 100 ई-बसों का संचालन शुरू करना है। टिकिटिंग सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग पूरी होने के बाद अब ये बसें शहर के विभिन्न स्टॉप पर रुकना शुरू करेंगी।
भोपाल में एयर कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसों का वाणिज्यिक संचालन ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम की जांच पूरी न होने के कारण 1 अगस्त से संभावित है। शहर में 20 जुलाई से बसों का ट्रायल रन जारी है, वहीं औपचारिक लोकार्पण 15 अगस्त को प्रस्तावित है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) के अनुसार, तकनीकी परीक्षणों के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत भोपाल को 100 बसें स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से 21 डिपो पहुंच चुकी हैं। यात्रियों को पुरानी लो-फ्लोर बसों के समान ही किराया देना होगा, जबकि उन्हें एसी सहित आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
मध्य प्रदेश के पांच बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में कुल 587 इलेक्ट्रिक एसी बसों (ई-बसों) का संचालन किया जाएगा। भोपाल में इन बसों का परीक्षण प्रमुख सड़कों पर जारी है, जहां शुरुआती चरण में 10 प्रमुख मार्गों पर इनका वाणिज्यिक परिचालन शुरू होगा। इन बसों में प्रति किलोमीटर 1.50 रुपये की दर से किराया तय किया गया है, जिसमें 10 किलोमीटर की दूरी के लिए मात्र 15 रुपये का भुगतान करना होगा। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से यह परियोजना एक निजी एजेंसी द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।