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2026-10-17

इसरो कर्मचारियों ने निजीकरण नीति पर चेयरमैन से जवाब मांगा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की नीति के बीच इसरो के कर्मचारियों ने अपने भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं। चार सितंबर को नौ कर्मचारी संगठनों ने इसरो चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र भेजा। पत्र में निजीकरण की नीति, इसरो की भविष्य की भूमिका और मौजूदा कर्मचारियों के साथ-साथ आने वाली भर्तियों पर इसके असर की जानकारी मांगी गई। इन संगठनों में इसरो के अलग-अलग केंद्रों के कर्मचारी संगठन शामिल हैं, जो हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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निजीकरण को लेकर चिंता का कारण

कर्मचारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के हालिया बयान का हवाला दिया। पवन कुमार गोयनका के अनुसार, आगे चलकर इसरो प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और इनका निर्माण निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रमों के जरिए किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यह बदलाव छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) से शुरू हो चुका है और आगे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) तथा LVM3 तक पहुंच सकता है। इस स्थिति से कर्मचारियों में भविष्य को लेकर बेचैनी पैदा हुई है।

निजी क्षेत्र को सौंपे जाने वाले संभावित कार्य

कर्मचारियों ने प्रक्षेपण यानों के उत्पादन को निजी क्षेत्र को सौंपने से जुड़ी खबरों पर चिंता जताई है। इसके अतिरिक्त, नियमित उपग्रह निर्माण का काम इसरो से बाहर ले जाने और कुलसेकरपट्टिनम में प्रस्तावित स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स जैसी नई प्रक्षेपण सुविधाओं को निजी संस्थाओं के लिए खोलने का मुद्दा उठाया गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि इसरो की लगभग 120 तकनीकों को पहले ही निजी क्षेत्र को हस्तांतरित किया जा चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि इन बदलावों को लेकर विभाग की ओर से अब तक स्पष्ट आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

कर्मचारियों को संभावित नुकसान

कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यदि इसरो प्रक्षेपण यान और उपग्रह बनाने से पीछे हटता है, तो संस्थान में अंदरूनी काम कम हो सकता है। इससे स्वीकृत पदों में कमी या भर्ती पर रोक लग सकती है, साथ ही तकनीकी, वैज्ञानिक, प्रशासनिक, खरीद, गुणवत्ता और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में पदोन्नति और कौशल विकास के अवसर घट सकते हैं। संगठनों ने चेतावनी दी कि मौजूदा कर्मचारियों को अतिरिक्त माना जा सकता है, उनका दूसरी जगह तबादला हो सकता है या उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल सकता है। इसके अलावा, ग्रुप ए, बी और सी की भर्तियां घटने से युवाओं के लिए इसरो में करियर के मौके भी कम हो सकते हैं।

कर्मचारी संगठनों की स्पष्ट राय

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे निजी कंपनियों की भागीदारी या वैध व्यावसायीकरण के विरोध में नहीं हैं। उनका कहना है कि न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए तय नियमों के तहत निजी भागीदारी की जा सकती है। उनकी मुख्य चिंता यह है कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देने और इसरो की अपनी क्षमता को खत्म करने के बीच साफ सीमा तय नहीं की गई है। संगठनों ने कहा कि प्रक्षेपण यान का डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण केवल सामान्य उत्पादन का काम नहीं है, बल्कि यह इसरो की मुख्य क्षमता, संस्थागत अनुभव और रणनीतिक ताकत का हिस्सा है।

स्पष्टीकरण की मांग

कर्मचारी संगठनों ने पूछा है कि पवन कुमार गोयनका की ओर से कही गई बातें क्या सरकार की आधिकारिक नीति हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि क्या इसरो आगे भी पीएसएलवी, एलवीएम3, एसएसएलवी और इनके भविष्य के संस्करणों के डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी निभाता रहेगा। संगठनों ने सरकार से निजी भागीदारी की नीति, उसके कानूनी और प्रशासनिक आधार, उसे लागू करने के चरण और कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर को स्पष्ट करने वाला आधिकारिक दस्तावेज जारी करने की मांग की है। कर्मचारी संगठन मानते हैं कि निजी कंपनियों की भागीदारी और इसरो की अपनी तकनीकी क्षमता को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार को स्पष्ट करना होगा कि इसरो की मुख्य जिम्मेदारियां क्या रहेंगी। कर्मचारियों का कहना है कि आधिकारिक नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनके साथ उनके परिवारों में भी भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।