बुलंद सोच।

भारत में प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के साथ ही कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव इतिहास का एक अनोखा मामला सामने आया है। भारत में जन्मे 16 महीने के नर चीते (केएनजी-23) और छह महीने पहले बोत्सवाना से लाए गए 2 वर्षीय नर चीते (सीसीबी-4) के बीच जुड़वा भाइयों जैसा गहरा सामाजिक गठबंधन बन गया है। मप्र की पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. समीता राजौरा के अनुसार, नर चीतों में ऐसा जुड़ाव आमतौर पर केवल सगे भाइयों के बीच होता है। बिना किसी पारिवारिक संबंध के, दो अलग-अलग देशों के चीतों द्वारा आपस में मिलकर टीम बनाना दुनिया की पहली और ऐतिहासिक घटना है। दोनों चीते बिना किसी आक्रामकता के एक साथ शिकार साझा करते हैं, एक-दूसरे को पुकारने के लिए आवाज निकालते हैं, एक-दूसरे की सफाई (ग्रूमिंग) करते हैं और रक्षा भी करते हैं।
रिश्ते की शुरुआत
मार्च में घायल केएनजी-23 को इलाज के लिए बाड़े में रखा गया था, जहां बोत्सवाना से आया सीसीबी-4 भी अकेला था। पास के बाड़ों में रहते हुए दोनों में सकारात्मक रुचि दिखी। जुलाई में प्रबंधन ने दोनों के बीच की बाड़ हटा दी, जिसके बाद दोनों ने शांतिपूर्वक साथ रहना और भोजन साझा करना शुरू कर दिया।
भारत में चीता कुनबा
चार साल में भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर 52 हो गया है। वर्ष 2022 से 2026 के बीच अफ्रीका के तीन देशों (नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना) से 29 चीते लाए गए, जिनमें से 20 जीवित हैं। इस दौरान भारत की धरती पर 49 चीतों का जन्म हुआ, जिनमें से 32 जीवित हैं। वर्तमान में देश में कुल 52 चीते हैं, जिनमें कूनो में 49 और गांधी सागर में 3 चीते शामिल हैं। इनमें से नामीबियाई मूल के कुनबे में 25, दक्षिण अफ्रीकी मूल के 18 और बोत्सवाना मूल के सभी 9 चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं।

