कूनो नेशनल पार्क से करीब 10 दिन पहले बाहर निकला एक चीता मानपुर और सोंईकलां इलाके में है। यह जंगल वापस लौटना चाह रहा है, लेकिन रास्ते में इंसानी भीड़ और शोर-शराबे के कारण भयभीत होकर बार-बार रास्ता बदल रहा है। चीता ट्रेकिंग टीम उस पर लगातार नजर रख रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान और किसानों द्वारा खदेड़े जाने के बाद उसने अपना रास्ता बदला। पिछले तीन दिनों से उसने कोई शिकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र के किसान डरे हुए हैं और खेतों में जाने से बच रहे हैं।
कूनो नेशनल पार्क से निकला एक चीता शनिवार को श्योपुर के मानपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव के पास रिहायशी इलाके में पहुंच गया। उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने दूर से दीदार का आनंद लिया और वीडियो बनाए। चीता ट्रैकिंग टीम ने लोगों को शोर न करने की सलाह दी। ग्रामीणों ने चीते को देखकर खुशी व्यक्त की, लेकिन बच्चों और मवेशियों को लेकर चिंता भी जताई। दिन भर पेड़ों की छांव में रहने के बाद, चीता अब चंबल नदी की ओर बढ़ रहा है। ट्रैकिंग टीम उस पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि पहले भी चीते चंबल पार कर राजस्थान पहुंच चुके हैं।
विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल द्वारा उठाए गए चीतों के भोजन में घोटाले के आरोपों को सरकार ने खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित जवाब में बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के भोजन पर तीन साल में 1 करोड़ 89 लाख 92 हजार 826 रुपये खर्च हुए हैं। इस अवधि में 54,411.36 किलोग्राम भैंस और बकरे का मांस खरीदा गया। सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया और चहेते ठेकेदार को टेंडर देने की बात को निराधार बताया।
कूनो नेशनल पार्क के गेट मानसून के लिए बंद होने के बावजूद चीते रहवासी इलाकों, खेतों और सड़कों पर देखे जा रहे हैं। पार्क में कुल 49 चीते हैं, जिनमें से 19 खुले जंगल में हैं और नौ गांवों के आसपास दिखते हैं। श्योपुर, बड़ौदा और राजस्थान के कई इलाकों में भी इनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में चीतों द्वारा इंसानों पर हमले की कोई घटना नहीं हुई है, लेकिन पालतू जानवरों के शिकार से पशुपालकों में असंतोष है, जिसके लिए मुआवजे का प्रावधान है। कूनो डीएफओ आर. थिरुकुराल के अनुसार, वन विभाग की ट्रेकिंग टीमें चीतों पर लगातार नज़र रख रही हैं।