विदिशा जिले के कागपुर स्थित तालाब और उसके आसपास के 53.5 हेक्टेयर क्षेत्र को कागपुर पक्षी संरक्षण रिजर्व घोषित कर दिया गया है। मध्यप्रदेश राजपत्र में इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद यह क्षेत्र अब पक्षियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में जाना जाएगा। वन विभाग के सर्वे में यहां बगुला, ब्लैक आइबिस, रामचिरैया और नीलकंठ जैसे कई पक्षी पाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले साल 21 नवंबर को इसकी घोषणा की थी, जिसे नौ माह बाद अब सरकारी दर्जा मिल गया है।
कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मे 16 महीने के नर चीते KNG-23 और बोत्सवाना से लाए गए 2 वर्षीय नर चीते CCB-4 के बीच जुड़वा भाइयों जैसा अनोखा सामाजिक बंधन बना है। मप्र की पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. समीता राजौरा के अनुसार, बिना पारिवारिक संबंध के दो अलग-अलग देशों के चीतों का यह जुड़ाव वन्यजीव इतिहास में पहली ऐतिहासिक घटना है। दोनों चीते शिकार साझा करते हैं, एक-दूसरे की सफाई करते हैं और रक्षा भी करते हैं। प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने पर भारत में चीतों की कुल संख्या 52 हो गई है, जिनमें से 49 कूनो और 3 गांधी सागर में हैं।
मध्यप्रदेश के नौरादेही (वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) में दो चीते व्योम और नीरा को 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट रिलीज बाड़े में छोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह कार्रवाई की, जिससे नौरादेही कूनो और गांधीसागर के बाद चीतों का तीसरा घर बन गया है। देश में अब कुल 60 चीते हैं, जिनमें से नौरादेही में 2, गांधीसागर में 4 और शेष कूनो में हैं। नौरादेही अपनी अनूठी विशेषता के लिए जाना जाता है, जहां चीतों को बाघों, तेंदुओं और भेड़ियों के बीच बसाया जा रहा है, जो 100-150 साल पहले की स्थिति को दोहराने का प्रयास है।
राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन पर नकेल कसने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा एक्शन प्लान लागू किया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मुरैना में 16 स्मार्ट चेकपोस्ट बनेंगे, ड्रोन से निगरानी होगी और 300 जवान तैनात किए जाएंगे। 12 जिलों से 34 अनुभवी वनरक्षकों को मुरैना स्थानांतरित किया गया है, जो स्थानीय भूगोल और माफिया नेटवर्क से परिचित हैं। इन वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान बंदूक चलाने का अधिकार और बिना मजिस्ट्रियल जांच के सीधी एफआईआर व गिरफ्तारी से छूट जैसे कानूनी कवच भी प्रदान किए गए हैं।
कूनो नेशनल पार्क से निकला एक चीता शनिवार को श्योपुर के मानपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव के पास रिहायशी इलाके में पहुंच गया। उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने दूर से दीदार का आनंद लिया और वीडियो बनाए। चीता ट्रैकिंग टीम ने लोगों को शोर न करने की सलाह दी। ग्रामीणों ने चीते को देखकर खुशी व्यक्त की, लेकिन बच्चों और मवेशियों को लेकर चिंता भी जताई। दिन भर पेड़ों की छांव में रहने के बाद, चीता अब चंबल नदी की ओर बढ़ रहा है। ट्रैकिंग टीम उस पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि पहले भी चीते चंबल पार कर राजस्थान पहुंच चुके हैं।
जबलपुर हाईकोर्ट ने वन अधिकारियों की सुरक्षा और वन क्षेत्रों में सक्रिय शिकारियों के मोबाइल डेटा की अनुपलब्धता के मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है। जस्टिस आनंद पाठक और बी.पी. शर्मा की युगलपीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट मित्र ने बताया कि वन अधिकारियों को हथियार उपयोग करने पर पाबंदियों के कारण वे डरते हैं। कोर्ट ने धार में बाओबाब पेड़ों की कटाई पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई का आदेश दिया, तथा राज्य जैव विविधता बोर्ड से रिपोर्ट मांगी। खंडवा में वन कर्मचारियों पर हुए हमले का भी जिक्र किया गया, जहां लगभग 40 कर्मचारी घायल हुए थे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल सेंट्रल जोन बेंच ने कोलार रोड स्थित अकबरपुर बाघ भ्रमण क्षेत्र में अवैध खुदाई, पहाड़ी कटान और पेड़ों की कटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने नवदुनिया में प्रकाशित एक समाचार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए और मध्यप्रदेश शासन, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि सरकारी भूमि पर मशीनों से खुदाई कर पहाड़ी को समतल किया जा रहा था, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। एक दो सदस्यीय समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
भोपाल के कलियासोत डैम के वेटलैंड एरिया में रविवार को हुई ‘मड रैली’ पर विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरणविदों ने इसे जलीय जीव-जंतुओं और वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए आयोजकों पर एफआईआर की मांग की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जनवरी 2020 में भोपाल सहित देशभर के वेटलैंड्स में ऐसी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। घटना के दौरान 50 से अधिक गाड़ियां टकराईं और कुछ लोग घायल हुए, बावजूद इसके पुलिस व जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी। टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
खंडवा के पंधाना क्षेत्र में वन विभाग ने तीन माह से ग्रामीणों में दहशत फैला रहे एक तेंदुए को पिंजरे में फंसाया है। रविवार सुबह जामली बीट के कंपार्टमेंट नंबर 711 में रखे पिंजरे में तेंदुआ मिला, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। विभाग पिछले चार दिनों से तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रहा था। शनिवार को एक बड़े पिंजरे में मुर्गे का चारा रखकर उसे आकर्षित किया गया, जिससे तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया। बाद में तेंदुए को कंपार्टमेंट नंबर 718, इटारिया के पास दीवाल बीट में सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
मध्य प्रदेश सरकार सितंबर-अक्टूबर 2026 में हिरण और नीलगायों को पकड़ने के लिए एक नया रेस्क्यू अभियान चलाएगी। यह घोषणा विधानसभा में हुई, जहाँ राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी के प्रश्न का उत्तर दिया। शाजापुर जिले में वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान के बाद, 2025 में दक्षिण अफ्रीका की बोमा तकनीक का उपयोग कर एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जिसमें 913 वन्यजीवों को पकड़ा गया था। आगामी अभियान का उद्देश्य किसानों को राहत पहुँचाना और वन्यजीव-मानव संघर्ष को कम करना है।