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कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकला चीता जंगल लौटने में कर रहा देरी, भीड़ और शोर-शराबा बन रहा बाधा

कूनो नेशनल पार्क से करीब 10 दिन पहले बाहर निकला एक चीता मानपुर और सोंईकलां इलाके में है। यह जंगल वापस लौटना चाह रहा है, लेकिन रास्ते में इंसानी भीड़ और शोर-शराबे के कारण भयभीत होकर बार-बार रास्ता बदल रहा है। चीता ट्रेकिंग टीम उस पर लगातार नजर रख रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान और किसानों द्वारा खदेड़े जाने के बाद उसने अपना रास्ता बदला। पिछले तीन दिनों से उसने कोई शिकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र के किसान डरे हुए हैं और खेतों में जाने से बच रहे हैं।

मप्र में एशियाई सिंहों को बसाने की योजना, गुजरात से आएगा नया जोड़ा

मध्य प्रदेश में कूनो चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब एशियाई सिंहों को बसाने और उनके प्रजनन के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां बनाने की योजना है। वन विहार प्रबंधन इस साल नवंबर-दिसंबर में गुजरात से शुद्ध नस्ल के एशियाई सिंहों का जोड़ा लाने की तैयारी कर रहा है। इनसे जन्म लेने वाले शावकों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में बसाया जाएगा। वर्तमान में भोपाल, ग्वालियर और इंदौर के चिड़ियाघरों में कुल 22 सिंह हैं। पूर्व में वन विहार में प्रजनन के प्रयास सफल नहीं हो सके, जबकि इंदौर चिड़ियाघर ने सफलतापूर्वक 21 सिंहों को अन्य चिड़ियाघरों में भेजा है।

कूनो और श्योपुर-मुरैना के जंगलों से तेंदुओं का शिकार करने वाले 7 शिकारी गिरफ्तार

कूनो नेशनल पार्क और श्योपुर-मुरैना के वन मंडल के जंगलों से 10 तेंदुओं के शिकार में शामिल सात शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी श्योपुर जिले के विजयपुर इलाके के झार बरौदा गांव के निवासी हैं। इनकी गिरफ्तारी आगरा में 23 जुलाई 2026 को 10 तेंदुओं की खाल और अवशेषों के साथ पकड़े गए चार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हुई है। वन विभाग और एसटीएसएफ के संयुक्त दल ने इन्हें गिरफ्तार कर शिवपुरी की विशेष अदालत में पेश किया है। आरोपियों से तेंदुए की हड्डियां और शिकार के औजार बरामद हुए हैं। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. समीता राजौरा ने इसकी पुष्टि की है।

कूनो नेशनल पार्क बंद होने के बावजूद चीते रहवासी इलाकों में घूम रहे

कूनो नेशनल पार्क के गेट मानसून के लिए बंद होने के बावजूद चीते रहवासी इलाकों, खेतों और सड़कों पर देखे जा रहे हैं। पार्क में कुल 49 चीते हैं, जिनमें से 19 खुले जंगल में हैं और नौ गांवों के आसपास दिखते हैं। श्योपुर, बड़ौदा और राजस्थान के कई इलाकों में भी इनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में चीतों द्वारा इंसानों पर हमले की कोई घटना नहीं हुई है, लेकिन पालतू जानवरों के शिकार से पशुपालकों में असंतोष है, जिसके लिए मुआवजे का प्रावधान है। कूनो डीएफओ आर. थिरुकुराल के अनुसार, वन विभाग की ट्रेकिंग टीमें चीतों पर लगातार नज़र रख रही हैं।