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2026-10-17

मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉप आउट दर शून्य

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मध्य प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट यानी बीच में पढ़ाई छोड़ने की दर शून्य प्रतिशत पर आ गई है।

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प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2002-03 में प्राथमिक स्तर पर यह दर 15 प्रतिशत थी। पिछले 23 वर्षों में यह लगातार घटते हुए अब शून्य हो गई है।

हालांकि, माध्यमिक स्तर पर अभी 6.2 प्रतिशत और सेकंडरी स्तर पर 13 प्रतिशत विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

सरकार के अनुसार, विद्यार्थियों को स्कूल से जोड़े रखने में साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और समेकित छात्रवृत्ति जैसी प्रोत्साहन योजनाओं की भूमिका रही है।

वहीं, स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए ‘गृह संपर्क अभियान’ चलाया गया। इस अभियान में शिक्षकों ने घर-घर सर्वे कर अप्रवेशित और ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान की और उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिलाया।

अभियान के जरिए प्रदेशभर में अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ा गया है।

सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की जा रही हैं।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक प्रदेश के मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास स्वीकृत की गई हैं।