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2026-10-17

मध्य प्रदेश: वायु प्रदूषण पर 744 करोड़ खर्च, इंदौर सहित तीन शहरों में बढ़ा पीएम10 स्तर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मध्य प्रदेश के सात शहरों को वायु प्रदूषण कम करने हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत 1,042 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई थी। इस राशि में से लगभग 744 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। हालांकि, प्रदूषण कम करने के परिणाम सभी शहरों में एक समान नहीं रहे।

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इंदौर, ग्वालियर और देवास में पीएम10 का स्तर घटने के बजाय बढ़ गया।

दूसरी ओर, जबलपुर और उज्जैन में पीएम10 के स्तर में लगभग 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

भोपाल और सागर में पीएम10 का स्तर लगभग स्थिर रहा या उसमें मामूली बढ़ोतरी देखी गई।

यह आंकड़ा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भोपाल में वायु प्रदूषण से संबंधित एक मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में विचाराधीन है, और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किए गए कार्यों तथा उनके परिणामों की निगरानी की जा रही है।

शहरवार स्थिति और पीएम10 स्तर

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को 312.59 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें से 250.19 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की समीक्षा के अनुसार, 2017-18 के मुकाबले 2023-24 में इंदौर का वार्षिक औसत पीएम10 82 से बढ़कर 99 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर हो गया, जो लगभग 20.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

ग्वालियर को 137.79 करोड़ रुपये जारी किए गए और 101.28 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। यहां पीएम10 का स्तर 2017-18 के 126 से बढ़कर 2023-24 में 136 माइक्रोग्राम हो गया, जिसमें 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

देवास में 23.68 करोड़ रुपये जारी किए गए और 9.70 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। इस शहर में पीएम10 का स्तर 83 से बढ़कर 99 माइक्रोग्राम हुआ, जो 19.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

जबलपुर को 217.81 करोड़ रुपये जारी किए गए और 149.61 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। यहां पीएम10 का स्तर 101 से घटकर 91 माइक्रोग्राम हो गया, जो लगभग 9.9 प्रतिशत की कमी है।

उज्जैन में 39.63 करोड़ रुपये जारी किए गए और 17.68 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। इस शहर में पीएम10 का स्तर 93 से घटकर 84 माइक्रोग्राम हुआ, जिसमें लगभग 9.7 प्रतिशत की कमी आई।

भोपाल को 286.65 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें से 196.45 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ। यहां पीएम10 का स्तर 112 से बढ़कर 113 माइक्रोग्राम हो गया, जो मामूली बढ़ोतरी है।

सागर में 24 करोड़ रुपये में से 18.93 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ। इस शहर में पीएम10 का स्तर 73 से बढ़कर 74 माइक्रोग्राम हुआ, जो भी एक मामूली बढ़ोतरी है।

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण

एनसीएपी की कार्ययोजनाओं में वायु प्रदूषण के पांच बड़े मोर्चे बताए गए हैं। इनमें सड़क की धूल, जिसमें धूल भरी सड़कें और किनारे की मिट्टी शामिल है; वाहन, जिसमें बढ़ता यातायात और उत्सर्जन शामिल है; निर्माण, जिसमें निर्माण और मलबे से उड़ती धूल शामिल है; कचरा जलाना, जिसमें खुले में कचरा और बायोमास जलाना शामिल है; तथा उद्योग, जिसमें औद्योगिक इकाइयों से होने वाला उत्सर्जन शामिल है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी)

केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश के उन शहरों में वायु प्रदूषण को कम करना था, जहां लगातार खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की जा रही थी। शुरुआत में, 2017 को आधार वर्ष मानकर 2024 तक पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

बाद में इस लक्ष्य को संशोधित किया गया। वर्तमान में, 2019-20 के आधार वर्ष की तुलना में 2025-26 तक पीएम10 में 40 प्रतिशत तक की कमी लाने या वार्षिक राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर हासिल करने का लक्ष्य है। वर्तमान एनसीएपी में 130 शहर शामिल हैं, जो 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।

अन्य संबंधित तथ्य

मध्य प्रदेश के 352 निकायों में सीवेज सिस्टम नहीं है, और 61 शहरों के 12.67 लाख घर सीवर लाइन से दूर हैं। इस स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ी नाराजगी जताई है।