उज्जैन में महाकाल मंदिर पार्किंग के लिए उपयोग की जा रही 40 हजार वर्गफीट शासकीय भूमि की रजिस्ट्री को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि शासकीय जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई। एडवोकेट जयेश गुरनानी ने बताया कि यह जमीन 1950 में शासकीय कारखाने के नाम दर्ज थी, पर बाद में निजी नाम दर्ज हो गए। तहसीलदार की अनुशंसा के बावजूद यह जमीन एक कंपनी को पंजीकृत कर दी गई थी। न्यायालय ने सिंहस्थ 2028 का भी उल्लेख किया।