बुलंद सोच, जबलपुर।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंत्रि-परिषद ने जबलपुर में ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से यह उपलब्धि मिली है। करीब आठ साल से तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को डॉ. मोहन सरकार में मंजूरी मिली है। जबलपुर में एक दशक से तकनीकी विश्वविद्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो अब महाकोशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के बनने के साथ पूरी हुई है।
क्षेत्रीय प्रभाव और लाभ
यह विश्वविद्यालय जबलपुर सहित महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नए विश्वविद्यालय से इन क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और संस्थानों की गुणवत्ता को और मजबूती मिलेगी। इस विश्वविद्यालय से जबलपुर संभाग के अलावा सागर, शहडोल और रीवा संभाग के सभी जिलों में संचालित सरकारी-निजी तकनीकी शिक्षण संस्थान जुड़ेंगे। इन कॉलेजों के परीक्षा-परिणाम और शोध से जुड़े कार्यों के लिए जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय में आना होगा। इस उपलब्धि के साथ ही संस्कारधानी शिक्षाधानी बनने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया है।
बजट और आगे की प्रक्रिया
विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया है। इस राशि से प्रशासनिक भवन का निर्माण और नए पदों का सृजन किया जाएगा। शासन ने घोषणा के साथ ही एक समिति का गठन किया है, जो अब आगे की प्रक्रिया करेगी। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (जेईसी) के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक ने बताया कि कॉलेज की तरफ से भी जानकारी दी गई थी।
जबलपुर की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति
जबलपुर में वर्तमान में छह शासकीय विश्वविद्यालय संचालित हैं, जिनमें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय और धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके अलावा पं. द्वारका प्रसाद मिश्र प्रौद्योगिकी संस्थान एवं विनिर्माण संस्थान भी है, जिसका विश्वविद्यालय भी खुलने जा रहा है। शहर में दो निजी विश्वविद्यालय, एक केंद्र का ट्रिपलआईटी डीएम संस्थान, 163 तकनीकी, पारंपरिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थान तथा 14 मेडिकल शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थान भी हैं। राज्य विश्वविद्यालयों में 1.75 लाख विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। यहां 11 इंजीनियरिंग कॉलेज भी हैं।
महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय का महत्व
मप्र सरकार में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि यह जबलपुर के लिए बड़ी उपलब्धि है, जिससे महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और संस्थानों की गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी शिक्षाधानी बनने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया है। जबलपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद आशीष दुबे ने इसे स्किल इंडिया के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बड़ा प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इससे महाकौशल अंचल के अलावा कई संभागों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और रोजगार के कई अवसर भी पैदा होंगे। कैंट विधायक अशोक रोहाणी ने इसे जबलपुर और कैंट विधानसभा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, जिसके लिए लगातार शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इसके लिए साधुवाद दिया और कहा कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमिका
1947 में स्थापित जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास वर्तमान में करीब 160 एकड़ का परिसर है, जिसमें 9 स्नातक और 10 स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रम संचालित हैं। इससे पहले करीब 100 एकड़ कॉलेज की जमीन अन्य शासकीय कार्य के लिए अधिग्रहीत हो चुकी है। कॉलेज में एमसीए, एप्लाइड केमिस्ट्री और एप्लाइड मैथमेटिक्स के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी संचालित हैं। यहां करीब 20 भवन और कई ऑडिटोरियम हैं। कॉलेज में 130 नियमित, संविदा और स्वाशासी फैकल्टी कार्यरत हैं, और लगभग इतने ही पद रिक्त हैं जिन्हें भरा जाना है।
कनेक्टिविटी हब
1.05 लाख करोड़ रुपये के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जबलपुर एक प्रमुख कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक हब बनेगा।

