BREAKING NEWS
2026-10-17

ममता बनर्जी ने टीएमसी चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, नई दिल्ली।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनाव चिह्न और नाम को फ्रीज करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तुरंत सुनवाई की मंजूरी दे दी है और मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए मंजूरी दी। इस याचिका में तृणमूल कांग्रेस का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। टीएमसी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने तुरंत सुनवाई की मांग की थी। सिब्बल ने कहा था कि चुनाव आयोग एक नोटिफिकेशन जारी करता है और नोटिफिकेशन के बीच में ही चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देता है, यह क्या हो रहा है और मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया जाए। इसके बाद पीठ ने मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

चुनाव आयोग का फैसला

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। इससे एक दिन पहले आयोग ने अपने अंतरिम फैसले में दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था और विवाद पर अंतिम फैसला होने तक पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में बनर्जी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। 18 सितंबर को बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘जोड़ा घास-फूल’ चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान खोने की तुलना एक मां के अपने बच्चे को खोने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ‘काला दिन’ बताया था। बनर्जी ने कहा था कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की असली पहचान तथा उसके ‘फूल-घास’ वाले चुनाव चिह्न को वापस पाने के लिए राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तौर पर आखिरी दम तक लड़ेंगी।

Advertisement

उपचुनाव के लिए अंतरिम व्यवस्था

चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। वहीं विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया है। पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। पश्चिम बंगाल में ये उपचुनाव इसलिए कराने पड़े क्योंकि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया। जबकि एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया।

टीएमसी में टूट का घटनाक्रम

चुनाव आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी विधायक दल में हुई बगावत के बाद आया है, जो बाद में संसद तक फैल गई। जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर से मान्यता हासिल की। पांच दिन बाद, यह बगावत संसद तक पहुंच गई, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने एनसीपीआई का साथ दिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन किया।