तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर पार्टी से जुड़ी एक जांच को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को भेजे पत्र में कहा है कि विरोधी पक्ष ऋतब्रत बनर्जी को अब और समय न दिया जाए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऋतब्रत को बार-बार अतिरिक्त समय देने से जांच में देरी हो रही है। उन्होंने 25 जुलाई की समयसीमा के बाद भी जानकारी न मिलने पर चिंता जताई और कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा डगमगा सकता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल ही में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, धन के उपयोग, स्वास्थ्य व्यवस्था, आपदा राहत और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने इसे ‘संगठित अपराध’ बताया और कहा कि इससे बंगाल की पाँच पीढ़ियों को नुकसान हुआ है। उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में सीजेपी के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सीजेपी आंदोलन में शामिल होने दिल्ली जाएंगी। ममता ने केंद्र पर लोकतांत्रिक विरोधों को दबाने, तानाशाही करने और कोविड-19 खरीद व धार्मिक आयोजनों में भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कोविड मामलों की जांच में पीएम मोदी का नाम आ सकता है। सीजेपी आंदोलन परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ, जिसमें सोनम वांगचुक की रिहाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।