राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष शाह के भाषण को सुनना नहीं चाहता और उनमें हिम्मत नहीं है। राहुल गांधी ने प्रश्न किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाने और लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए, जो गृह मंत्रालय से आए थे। उन्होंने कहा कि यदि शाह ने आदेश दिए तो उन्हें दोषी होने के कारण इस्तीफा देना चाहिए, और यदि नहीं दिए तो भी पद के योग्य न होने के कारण इस्तीफा दें। अमित शाह ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे संसद में मौजूद हैं और विपक्ष कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है, लेकिन वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं।
मानसून सत्र के 10वें दिन संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 3 अगस्त 2026 तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने अयोध्या में “दिनदहाड़े लूट” का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा।
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर पार्टी से जुड़ी एक जांच को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को भेजे पत्र में कहा है कि विरोधी पक्ष ऋतब्रत बनर्जी को अब और समय न दिया जाए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऋतब्रत को बार-बार अतिरिक्त समय देने से जांच में देरी हो रही है। उन्होंने 25 जुलाई की समयसीमा के बाद भी जानकारी न मिलने पर चिंता जताई और कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा डगमगा सकता है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी को बुधवार को पूरे मानसून सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया। उन पर असंसदीय भाषा के इस्तेमाल और एक बागी टीएमसी सांसद को ‘चोर’ कहने का आरोप है। यह कार्रवाई विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच हुई, जिसके कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई। निलंबन से पहले, बनर्जी की एनसीपीआई सांसदों से बहस हुई थी, जो पहले टीएमसी में थीं। यह विवाद टीएमसी में हुए विभाजन की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जहाँ पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद लगभग 20 सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होकर एनडीए सरकार को समर्थन दिया था।