बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण के तहत आबकारी अधिकारी, पुलिस और शराब ठेकेदारों के गठजोड़ से लाइसेंसी ठेका दुकानों से जहरीली और घटिया शराब की बिक्री में वृद्धि हुई है। शराब में मिलावटखोरी के कई मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। इन मामलों में जिम्मेदार आबकारी अधिकारियों के विरुद्ध फौरी तौर पर केवल निलंबन की कार्रवाई करके मामले को निपटा दिया जाता है। कुछ समय बाद निलंबित आबकारी अधिकारी फिर बहाल होकर मनचाही पदस्थापना करा लेते हैं। शराब माफिया को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। सागर ही नहीं, इससे पहले मुरैना, मंदसौर, उज्जैन, भिंड और इंदौर में भी जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मृत्यु हुई है। सागर में पुलिस और आबकारी विभाग को शराब की तस्करी और घटिया शराब की बिक्री के संबंध में सूचना थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन, जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई। यदि आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
गठजोड़ के उदाहरण
इस गठजोड़ के कई उदाहरण सामने आए हैं। अगस्त 2026 में मुरैना की कार्यवाहक प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी (एडीईओ) निधि गुप्ता का शराब ठेकेदार से पैसों के लेनदेन और मासिक रिश्वत की बातचीत का ऑडियो सामने आया था। इसके बाद कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। जुलाई 2026 के अंत में छतरपुर से एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसमें आबकारी विभाग की सरकारी गाड़ी से शराब की बोतलें दूसरी निजी गाड़ी में शिफ्ट की जा रही थीं। देवास जिले में शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना की मौत के मामले में प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित का एक ऑडियो वायरल हुआ था। बातचीत में दो करोड़ रुपये के सेटलमेंट, दबाव और लेन-देन का जिक्र था। धार जिले के तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) संजीव दुबे का भी एक व्हिसलब्लोअर के साथ बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह शराब ठेकेदारों द्वारा राजनेताओं को लाखों रुपये पहुंचाने और अवैध लेनदेन की बातें कर रहे थे। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था।
जहरीली शराब से पूर्व में हुई मौतें
जहरीली शराब से मौतें होने के बाद भी सबक नहीं लिया गया है। जनवरी 2021 में मुरैना जिले में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मृत्यु हुई थी और कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इस मामले में नवंबर 2025 में 14 दोषियों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई। न्यायाधीश ने सजा के साथ टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह कृत्य मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है, क्योंकि चंद पैसों के मुनाफे के लिए माफिया ने गरीब ग्रामीणों को मौत के मुंह में धकेल दिया। अक्टूबर 2020 में उज्जैन जिले में झिंझर शराब कांड हुआ था, जिसमें 14 लोगों की मौत हुई थी। मामले में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत भी सामने आई थी, जिसके बाद थाना प्रभारी सहित कई पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया गया था। जुलाई 2021 के अंतिम सप्ताह में इंदौर के पब-बार में नकली व जहरीली शराब (व्हिस्की/बीयर) पीने से छह लोगों की मृत्यु हो गई थी।
सागर कांड और अधिकारियों पर कार्रवाई
सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग गंभीर हैं। शराब के अवैध कारोबार को लेकर आबकारी और पुलिस विभाग कठघरे में हैं। दोनों विभाग के कुछ अधिकारियों को हटाने और निलंबन की कार्रवाई भी की गई है। सागर के वर्तमान पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनुराग सुजानिया हैं। वह वर्ष 2021 में जब मुरैना में एसपी थे, तभी वहां जहरीली शराब पीने से 21 लोगों की मौत हुई थी। इस पर उन्हें और तत्कालीन कलेक्टर अनुराग वर्मा को भी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर हटा दिया गया था। उस दौरान शराब के अवैध कारोबार पर सबसे अधिक आरोप पुलिस पर ही लगे थे। बागचीनी थाने के सभी पुलिसकर्मियों को भी हटा दिया गया था। मुरैना में सुजानिया के हटने के बाद तीन और लोगों की मौत हुई थी। अब सागर में भी मुरैना जैसी स्थिति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। वह अभी दुबई में हैं। वहां से लौटने पर सागर में पुलिस-प्रशासन के बड़े अधिकारियों को भी हटाया जा सकता है। सुजानिया इसके पहले पुलिस मुख्यालय में प्रशासन शाखा में एआईजी और मंदसौर व टीकमगढ़ में भी एसपी रह चुके हैं। सागर शराब कांड में बंडा टीआई और चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया है। शराब ठेकेदार समेत 20 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
नेता प्रतिपक्ष की मांगें
सागर में जहरीली शराब कांड को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरी व्यवस्था पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह केवल एक कंपनी या शराब बेचने वाले तक का विषय नहीं है। शराब में जिस मेथेनॉल के उपयोग की आशंका जताई जा रही है, वह कहां से आया, किसने शराब में मिलाया और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए लीपापोती न करने और सबकी जांच कराने की मांग की। सिंघार ने प्रत्येक मृतक के स्वजन को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की।

