BREAKING NEWS
2026-10-17

पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया पोस्ट पर सवाल; डीजीपी की नसीहत भी बेअसर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर डाली जा रही कई पोस्ट सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन करती हैं। कुछ पोस्ट तो अनुशासनहीनता की श्रेणी में भी आती हैं। कड़ी कार्रवाई के अभाव में इस कुप्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है और ऐसे मामले आए दिन सामने आ रहे हैं।

Advertisement

हाल ही में डीएसपी नेहा पच्चीसिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर और निलंबन के बाद उनके इंटरनेट मीडिया पोस्ट भी चर्चा में रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2025 में रीवा में सगरा थाने की प्रभारी अंकिता मिश्रा का फिल्मी गाने पर रील, शिवपुरी में एएसआई जितेन्द्र जाट का गुंडा सूची में शामिल युवक के साथ रील और शाजापुर में पुलिसकर्मी नितेश सेन का वर्दी में फिल्मी गाने पर रील सामने आ चुका है। ये ऐसे मामले हैं, जिन पर कार्रवाई की जा चुकी है।

सच्चाई यह है कि ऐसे मामलों की संख्या अधिक है, परंतु निगरानी के किसी पुख्ता तंत्र के अभाव में इन पर रोक नहीं लग पा रही है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा भी यह कह चुके हैं कि वर्दी में रील बनाकर उसे प्रसारित करना अनुचित है।

कई राज्यों ने इस संबंध में सख्त कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने तो अपनी इंटरनेट मीडिया पॉलिसी ही बना ली है। इस पॉलिसी में यह स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति इंटरनेट मीडिया से आय अर्जित नहीं की जा सकती है। कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों ने भी इस पर सख्ती से रोक लगाई है।

पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि जब तक संबंधित पुलिसकर्मी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से जनता को उचित परामर्श देता है, तब तक कोई समस्या नहीं है। हालांकि, यदि कोई पुलिसकर्मी पुलिस की छवि धूमिल करने वाला कार्य करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। इंटरनेट मीडिया में पोस्ट डालने को लेकर अलग से कोई कानून नहीं बना है; कार्रवाई सिविल आचरण संहिता के उल्लंघन के अंतर्गत ही की जाती है।

चर्चित मामले

शहडोल में ट्रैफिक हवलदार विवेकानंद तिवारी तब चर्चा में आए जब इंटरनेट मीडिया पर उनके फॉलोअर्स की संख्या पौने दो करोड़ तक पहुंच गई। कार्यालय से अवकाश पर रहने के दौरान वर्दी वाले पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर भेजने के कारण उन्हें दो माह पहले निलंबित कर दिया गया था। इसके साथ ही, इंटरनेट मीडिया में पोस्ट डालने से होने वाली आय की जांच भी शुरू कराई गई। उनकी अधिकतर पोस्ट यातायात नियमों के संबंध में लोगों को जागरूक करने को लेकर रही हैं।

जुलाई में दमोह की एसआई प्रियंका पटेल की इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी। इस पोस्ट में उन्होंने वर्दी में वीडियो बनाकर कहा था कि ‘खुद की समस्याएं सुलझ नहीं रही और नौकरी दूसरों की समस्याएं सुलझाने वाली कर ली।’ इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एवं डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की कुछ गाइडलाइन भी हैं। पुलिसकर्मियों को यह काउंसलिंग भी दी जाती है कि वर्दी की अपनी एक शान होती है और उसे हास्यास्पद स्थिति में नहीं लाना चाहिए।