मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर वर्दी में डाली जा रही पोस्ट सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन कर रही हैं। डीजीपी कैलाश मकवाणा की नसीहत के बावजूद निगरानी तंत्र के अभाव में इस पर रोक नहीं लग पा रही है। नेहा पच्चीसिया, अंकिता मिश्रा और विवेकानंद तिवारी जैसे कई मामले सामने आए हैं जिन पर कार्रवाई भी हुई है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों ने सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई है, जबकि अन्य राज्यों ने सख्ती से इस पर रोक लगाई है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पुलिस की छवि धूमिल होने पर ही कार्रवाई की जाती है।
जबलपुर के गढ़ा थाना के सामने एक महिला ने सड़क पर खड़े होकर वाहनों को रोका और काफी देर तक हंगामा किया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई। यह घटना थाने के ठीक सामने हुई, फिर भी पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आई, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अचानक वाहनों के रुकने से बड़े हादसे की आशंका भी बनी रही। महिला की पहचान और हंगामे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस घटना ने गढ़ा थाना और यातायात पुलिस की मुस्तैदी पर प्रश्नचिह्न लगाया है।
मध्य प्रदेश में पुलिस सब-इंस्पेक्टर और सूबेदार के 507 पदों पर भर्ती के लिए कर्मचारी चयन मंडल ने प्रक्रिया जारी की है। ऑनलाइन आवेदन 9 सितंबर से 23 सितंबर तक किए जा सकेंगे, जिसमें सर्वाधिक 312 पद उप निरीक्षक (जिला पुलिस बल) के लिए हैं। परीक्षा 28 अक्टूबर से होगी। वेतनमान 36,200 रुपये से 1,14,800 रुपये तक है। आवेदन शुल्क 250 से 500 रुपये तक है। साथ ही, निरंजन बी वायंगणकर को एडीजी साइबर सेल बनाया गया है और 30 सूबेदारों को रक्षित निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 223 कार्यवाहक निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों को निरीक्षक पद पर पदोन्नत करने का आदेश जारी किया है। यह पदोन्नति आदेश विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक और उसके प्रतिवेदन के आधार पर जारी किया गया है। इन अधिकारियों को निरीक्षक के रिक्त पदों पर अस्थायी रूप से पदोन्नत किया गया है और उन्हें मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के तहत पे-मैट्रिक्स लेवल-10 में प्रवेश मिलेगा। पूर्व में 1029 लोक सेवकों को भी इसी प्रक्रिया के तहत पदोन्नत किया गया था। पदोन्नत अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में पदस्थ हैं।
इंदौर की ट्रैफिक वार्डन शुभी जैन ने दो पुलिसकर्मियों पर विवाद के दौरान उन्हें ‘लेडिज जात’ कहकर संबोधित करने और आपत्तिजनक शब्द कहने का आरोप लगाया है। यह घटना तब हुई जब शुभी ट्रैफिक संभाल रही थीं और पुलिसकर्मी एक रिक्शा चालक से विवाद कर रहे थे। शुभी ने इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है। ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने मामले की रिपोर्ट मांगी है। शुभी जैन ट्रैफिक वार्डन के रूप में अपनी सेवाओं के लिए जानी जाती हैं और उनके वीडियो अक्सर वायरल होते हैं।
भोपाल के कमला नगर थाने में पुलिस पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार करणी सेना जिलाध्यक्ष हेमंत ठाकुर उर्फ राजपूत को हिरासत के दौरान विशेष सुविधाएँ दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि हवलदार दीपक कटियार ने हेमंत को पसंद का भोजन व फल दिए, अपनी निजी कार में घुमाया और सादे कपड़ों में जुलूस निकलवाया, जो निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत था। थाना प्रभारी निरूपा पांडे ने निर्देशों की अवहेलना की बात कही है। डीसीपी ने इस मामले में हवलदार दीपक कटियार को लाइन अटैच कर दिया है, जिसकी कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश पुलिस के 58 संवर्गों में रिकॉर्ड 27,534 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 11 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने इसकी जानकारी दी। इस फैसले से पुलिसकर्मियों की लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति की प्रतीक्षा समाप्त हुई है और नई पुलिस भर्तियों का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 अगस्त को ‘आभार एवं सम्मान समारोह’ में इसकी घोषणा करते हुए पुलिसकर्मियों के त्याग और समर्पण की सराहना की थी।
हाई कोर्ट ने नरसिंहपुर पुलिस के सिपाही हीरालाल यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए विभाग द्वारा 16 साल बाद जारी वेतन वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है। विभाग ने वेतन निर्धारण में गलती बताकर अधिक भुगतान की राशि वसूलने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि वसूली से पूर्व कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई राशि वसूल की गई है, तो उसे वापस किया जाए। याचिकाकर्ता को 1998 में बर्खास्त किया गया था और 2005 में बहाल किया गया था।
दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले पुलिस विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए 14 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इन अधिकारियों में थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक और प्रधान आरक्षक शामिल हैं। निष्पक्ष कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है, जिसमें लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यवाहक उप निरीक्षक पदोन्नति सूची में दिवंगत पुलिसकर्मी राकेश सिंह बघेल का नाम शामिल होने से विभागीय लापरवाही उजागर हुई है। पिछले वर्ष बीमारी के कारण निधन के बावजूद उनका नाम सूची में होने से रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस सूची में 2035 पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक उप निरीक्षक (एएसआई से कार्यवाहक एसआई) के पद पर पदोन्नति दी गई थी। इस प्रशासनिक चूक के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।