बुलंद सोच, बालाघाट।
खसरा और मलेरिया के संक्रमण से 25 और 26 अगस्त को दो और मासूम बच्चों की जान चली गई। बिरसा के बाद अब परसवाड़ा ब्लॉक में भी संक्रमण फैल गया है। परसवाड़ा की मोहनपुर पंचायत के बैगाटोला (सोनेवानी) निवासी लवकुश पिता सुकलु मरकाम (6) की बुधवार अलसुबह चार बजे मलेरिया से मौत हो गई। बिरसा ब्लॉक के लालपुर पंचायत के धामनगांव की चार वर्षीय माही पिता राकेश मरकाम (4) ने मंगलवार को गोंदिया (महाराष्ट्र) के एक निजी अस्पताल में मलेरिया के कारण दम तोड़ दिया। धामनगांव में यह दूसरी मौत है, इससे पहले गौरी धुर्वे ने भी जान गंवाई थी। माही की मां सविता मरकाम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या आठ से बढ़कर 10 हो गई है। हालांकि, कुल 26 मौतों का दावा किया जा रहा है।
लवकुश के अंतिम संस्कार पर विवाद
बैगाटोला में लवकुश की मौत ने जिला प्रशासन का अमानवीय चेहरा सामने लाया है। गांव में मातम के साथ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। ‘नईदुनिया’ ने बैगाटोला पहुंचकर स्वजनों और ग्रामीणों से बातचीत की। आरोप है कि लवकुश के माता-पिता को अंतिम बार अपने बेटे का चेहरा देखने नहीं दिया गया। लवकुश के पिता सुकलु और मां श्यामकली तीन महीने से हैदराबाद में आरा मिल में काम करते हैं। लवकुश अपने अन्य चार भाइयों के साथ दादा-दादी के साथ गांव में रहता था। आरोप है कि परसवाड़ा एसडीएम श्रीस प्यासी ने माता-पिता के लौटने का इंतजार नहीं किया और आनन-फानन में शव को दफना दिया।
विरोध प्रदर्शन
प्रशासनिक असंवेदनशीलता को लेकर आदिवासी विकास परिषद, बिरसा ब्रिगेड सहित अन्य संगठनों ने बंजारी चौक पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सीएमएचओ डाॅ. परेश उपलप और परसवाड़ा एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन के कारण दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने स्वजन को अन्य बच्चों में संक्रमण फैलने का डर दिखाकर बिना पोस्टमार्टम के ही शव दफन करा दिया। वहीं, प्रशासन का कहना है कि मृतक के दादा-दादी की सहमति से शव का अंतिम संस्कार किया गया था।
लवकुश की बीमारी और अंतिम संस्कार
लवकुश के दादा तुसलीराम ने ‘नईदुनिया’ को बताया कि लवकुश को मलेरिया था और वह तीन दिन से बीमार था। सोनेवानी उप स्वास्थ्य केंद्र में जांच के दौरान उसे मलेरिया होने की पुष्टि हुई थी। बुधवार रात करीब एक बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी और उल्टी-दस्त के चलते सुबह चार बजे उसकी मृत्यु हो गई। हैदराबाद में लवकुश के माता-पिता को फोन पर सूचना दी गई। वे बस से बुधवार देर रात बालाघाट पहुंचने वाले थे। तुसलीराम के पांच पोते हैं, जिनमें से लवकुश की मृत्यु हो गई। उनके तीन अन्य पोते अजय, अंकुश और अजय बीमार हैं, जिन्हें बुधवार को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया है। अनंत स्वस्थ है। बैगाटोला पहुंचे एसडीएम प्यासी ने गांव में संक्रमण फैलने का डर दिखाकर दोपहर 12 बजे लवकुश का अंतिम संस्कार (दफन) करा दिया। लवकुश की बुआ दादी फूलबती ने बताया कि अधिकारी बेटे-बहू के हैदराबाद से लौटने का इंतजार नहीं करने वाले थे। बैगा परंपरा के अनुसार शव पर सिक्के और चावल चढ़ाए जाते हैं। फूलबती जब 10-10 के दो सिक्के और थोड़ा चावल लेने मोहनपुर गई और लौटी, तब तक लवकुश को दफनाया जा चुका था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने पोते को विदा करने के दस्तूर भी पूरे नहीं करने दिए और शव पर चढ़ाने वाली फूलों की माला रखी की रखी रह गई।
उठे सवाल और अधिकारियों के बयान
प्रशासन द्वारा लवकुश के अंतिम संस्कार में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? माता-पिता और रिश्तेदारों का इंतजार क्यों नहीं किया गया? बिना पोस्टमार्टम के लवकुश का शव क्यों दफनाया गया? माता-पिता के लौटते तक शव को फ्रीजर में क्यों नहीं रखा गया? जब लवकुश तीन दिन से बीमार था, तो उसे अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया? बालाघाट कलेक्टर कुमार सत्यम ने कहा कि लवकुश का अंतिम संस्कार करने का निर्णय उसके दादा-दादी का था, न कि प्रशासन का। उन्होंने बताया कि दादा-दादी की सहमति के बाद ही परसवाड़ा एसडीएम ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कराई है। परिवार के अन्य बीमार बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आदिवासी विकास परिषद के दिनेश धुर्वे ने लगभग एक घंटे चले प्रदर्शन के दौरान कहा कि लवकुश के शव का बिना पोस्टमार्टम और दबाव डालकर अंतिम संस्कार किया गया है। यह प्रशासन की असंवेदनशीलता और लापरवाही है। उन्होंने यह भी कहा कि बैगा अंचलों में मलेरिया से लगातार बच्चों की मौत हो रही है और बच्चे के माता-पिता के लौटते तक शव को फ्रीजर में रखा जा सकता था। सीएमएचओ डाॅ. परेश उपलप ने बताया कि मलेरिया से मृत्यु के मामलों में शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शव को जल्दबाजी में या माता-पिता के आने से पहले ही दफनाने में स्वास्थ्य विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है। डाॅ. उपलप ने स्वीकार किया कि लवकुश को अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया था और इसके लिए फील्ड स्टाफ और बीएमओ को नोटिस दिया जाएगा। इस संबंध में परसवाड़ा एसडीएम श्रीस प्यासी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

