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बालाघाट में मलेरिया से दो और बच्चों की मौत, प्रशासन पर परिजनों के बगैर शव दफनाने का आरोप

बालाघाट में 25 और 26 अगस्त को मलेरिया संक्रमण से लवकुश (6) और माही (4) नामक दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में मरने वाले बच्चों की संख्या 10 हो गई है। लवकुश के शव को उनके माता-पिता की गैरमौजूदगी में जल्दबाजी में दफनाने को लेकर जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन का कहना है कि अंतिम संस्कार दादा-दादी की सहमति से हुआ, जबकि सीएमएचओ ने मलेरिया से मौत के मामलों में पोस्टमार्टम न होने की बात कही।

मुरैना में दुकानदारों ने मृत वानर का लाल कफन ओढ़ाकर किया अंतिम संस्कार

मुरैना के मुख्य बाजार में शुक्रवार को एक मृत वानर का शव सड़क पर मिला, जिसे नगर निगम के सफाईकर्मियों ने नहीं छुआ। सदर बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजेंद्र खेड़ा ने अपने साथी दुकानदारों और समाजसेवियों के साथ मिलकर वानर के शव को लाल कफन ओढ़ाया और माला पहनाई। वे स्कूटी पर शव को बड़ोखर मुक्तिधाम ले गए, जहां नगर निगम के श्मशान प्रभारी नीलेश कारखुर, अमन कारखुर और समाजसेवियों आशिफ कुरैशी व शिवसिंह खटीक ने विधि-विधान से गड्ढा खोदकर अंतिम संस्कार किया। तेजेंद्र खेड़ा के अनुसार, यह वानर बाजार में शांत स्वभाव का था और कभी किसी को परेशान नहीं करता था।

रायसेन के पिपलिया खुर्द में मुक्तिधाम के अभाव में बारिश के बीच तिरपाल और पेट्रोल से हुआ अंतिम संस्कार

रायसेन के पिपलिया खुर्द में मुक्तिधाम के अभाव के कारण काशीबाई का अंतिम संस्कार भारी बारिश में तिरपाल, पेट्रोल और टायरों की मदद से हुआ। ग्रामीणों ने पंचायत की उदासीनता पर आक्रोश व्यक्त किया, क्योंकि वर्षों से स्वीकृत श्मशान घाट का निर्माण नहीं हो सका है। जनपद सीईओ मोगराज मीणा ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई और सभी पंचायतों को निर्देशित करने का आश्वासन दिया। यह घटना ग्राम पंचायतों द्वारा मुक्तिधाम निर्माण के लिए मिले बजट के बावजूद कार्य न होने और वर्तमान निर्देशों के प्रति उदासीनता को उजागर करती है।

वृद्धाश्रम में पिता का शव दो दिन तक रखा रहा, बच्चों ने अंतिम संस्कार से किया इनकार

भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय घनश्याम की मृत्यु के बाद उनके चार बच्चों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। आश्रम प्रबंधन को दो दिन तक शव रखना पड़ा और अंततः पुलिस की सहायता से अंतिम संस्कार कराया गया। बेटियों ने संपत्ति न मिलने का हवाला दिया, जबकि बेटों ने कहा कि पिता ने उनके लिए कुछ नहीं किया। आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि परिवार ने बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा, जिसे देने से इनकार कर दिया गया। यह घटना बुजुर्गों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाती है।

भोपाल वृद्धाश्रम में पिता का शव दो दिन रखा रहा, परिवार अंतिम संस्कार को नहीं पहुंचा

भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय घनश्याम का 4 अगस्त को निधन हो गया। उनके शव को दो दिन तक परिवार के आने के इंतजार में रखा गया, लेकिन कोई परिजन अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। अंततः आश्रम प्रबंधन ने पुलिस की सहायता से उनका अंतिम संस्कार कराया। घनश्याम के दो बेटे और दो बेटियां हैं। एक बेटी ने संपत्ति न मिलने का हवाला देकर अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया। बाद में परिवार ने मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग की, जिस पर आश्रम संचालिका ने नाराजगी जताई। घनश्याम को चार साल पहले परिवार द्वारा भोपाल में छोड़ दिया गया था।

आलीराजपुर में ईसाई धर्म अपनाने के आरोप पर युवक का शव मुक्तिधाम से लौटाया, निजी भूमि पर हुआ अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के ग्राम खरपाई में बोंदर सिंह चौहान (45) के शव का ग्रामीणों ने मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार नहीं करने दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मृतक ईसाई धर्म का पालन करता था और आदिवासी रीति-रिवाजों का सम्मान नहीं करता था। विवाद बढ़ने पर नानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। अंततः, परिजनों ने मृतक की निजी भूमि पर अंतिम संस्कार संपन्न किया। परिजनों ने इस घटना को अंतिम संस्कार पर राजनीति करार देते हुए दुख व्यक्त किया और बताया कि बोंदर सिंह एक वर्ष से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।

विदिशा के कराखेड़ी में श्मशान घाट के अभाव में बारिश में अस्थायी शेड में अंतिम संस्कार

विदिशा तहसील की ग्राम पंचायत कराखेड़ी में श्मशान घाट के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, 80 वर्षीय ग्रामीण रघुवीर दांगी के निधन पर बारिश के दौरान ग्रामीणों को अस्थायी शेड बनाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। श्मशान घाट के लिए प्रस्तावित जमीन पर विवाद के कारण निर्माण कई सालों से अटका हुआ है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार व सीईओ ने गांव का दौरा कर जांच के निर्देश दिए। यह समस्या केवल कराखेड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के 177 गांवों में शांतिधाम नहीं हैं, जबकि 237 गांवों में वे जर्जर हालत में हैं।

नांदनी गांव में मुक्तिधाम तक सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरी अंतिम यात्रा

भोपाल के नांदनी गांव में विकास के दावों की पोल खुल गई, जहां एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ भरे रास्ते से निकालनी पड़ी। मुक्तिधाम तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को कंधों पर शव ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद पंचायत और जनप्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान नहीं किया। सरपंच को मौके पर बुलाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। मुक्तिधाम के वैकल्पिक रास्ते पर भी अतिक्रमण है, जिसके कारण ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते का उपयोग करना पड़ा।

मेजर हमजा आरिफ को इंदौर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

मेजर हमजा आरिफ को रविवार को इंदौर में राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसलमेर (राजस्थान) में दुर्घटना में उनके निधन के बाद हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। सैफी नगर मस्जिद परिसर में जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसके बाद इमली बाजार स्थित दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी दी। सुपुर्दे खाक से पहले सम्मान का तिरंगा उनकी पत्नी ज्योति अरोड़ा को सौंपा गया। मेजर हमजा ने देश सेवा के लिए बड़ी कंपनियों के प्लेसमेंट को छोड़कर सेना में शामिल होने का विकल्प चुना था।

मेजर हमजा को सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक

राजस्थान के जैसलमेर में सड़क हादसे में शहीद हुए मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर रविवार सुबह इंदौर स्थित उनके निवास पर पहुंचा। उन्हें सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम दर्शन के लिए रखे गए पार्थिव शरीर से तिरंगा हटाकर उनकी पत्नी को सौंपा गया। इस दुर्घटना में मेजर हमजा की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लेफ्टिनेंट घायल हो गए थे। परिवार जैसलमेर से विशेष सैन्य वाहन में पार्थिव देह लेकर इंदौर पहुंचा था।