बुलंद सोच, इंदौर।

मध्यप्रदेश में राज्य परिवहन मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीआरटीसी) की तर्ज पर शुरू हो रही मुख्यमंत्री परिवहन सेवा का दायरा अब बढ़ने जा रहा है। सिटी बसों के ट्रायल के बाद, अब इंदौर से प्रदेश के 27 दूरस्थ शहरों के लिए इंटर-सिटी बसों के संचालन की तैयारी पूरी हो चुकी है। इंदौर के 27 मार्गों पर बसें अभी शुरुआती दौर में चलाई जानी हैं। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने इसके लिए 40 इंटर-सिटी मार्ग और स्कीम का प्रकाशन कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 सितंबर को हरी झंडी दिखाकर सरकारी बस सेवा की शुरुआत करेंगे।
अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) बसों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर कर रही है। इस स्कीम में बसें निजी ऑपरेटर की होंगी, लेकिन उनका परमिट, समय-सारणी, किराया निर्धारण और पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी के हाथ में होगा। इससे यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने और बसों के अवैध संचालन पर पूरी तरह रोक लगेगी। पहले चरण में प्रमुख शहरों के लिए बस सेवाएं शुरू होंगी, जिसके लिए ऑपरेटरों से प्रस्ताव मांगे गए थे और वे प्राप्त हो चुके हैं।
बसों की विशेषताएं और रूट
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलाई जाने वाली बसें नारंगी रंग की रहेंगी। फिलहाल, वर्कशॉप में पुरानी बसों को नारंगी रंग किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में अभी तक एआईसीटीएसएल द्वारा सिटी और इंटर इस्टेट बसों का संचालन किया जाता रहा है। अब ये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन आ गई हैं, जिसमें करीब 300 से ज्यादा सिटी बसें चलेंगी। साथ ही इंदौर-उज्जैन से लेकर सभी प्रमुख मार्गों के अलावा अंतरराज्यीय मार्गों पर भी ये बसें चलेंगी। यह सेवा मध्य प्रदेश में 20 साल बाद फिर से सरकारी बस सेवा को पटरी पर ला रही है।
इस सेवा के तहत इंदौर से सिंगरौली (889 किलोमीटर) का मार्ग सबसे लंबा होगा, जबकि खंडवा से रतलाम (263 किलोमीटर) सबसे छोटा मार्ग रहेगा। इसके जरिए यात्री महज 12 से 14 घंटे में इंदौर से प्रदेश के सुदूर जिलों तक पहुंच सकेंगे। सरकार ने पीक आवर्स को ध्यान में रखकर सर्वे किया है, ताकि जरूरत के समय ज्यादा बसें उपलब्ध कराई जा सकें।
श्रेणियाँ और किराया निर्धारण
यात्रियों की सुविधा और बजट के अनुसार छह अलग-अलग श्रेणियों की बसें चलाई जाएंगी। मिडी बसों की यात्री क्षमता 24 से 34 होगी, जबकि स्टैंडर्ड बसों की क्षमता 35 से 70 यात्री होगी। श्रेणियों में सामान्य, सेमी-डीलक्स, डीलक्स, एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी शामिल हैं। परिवहन विभाग का ‘किराया बोर्ड’ इनका किराया तय कर चुका है, जो सामान्य बसों के लिए न्यूनतम होगा।
प्रमुख कनेक्टिंग शहर
इंदौर से कनेक्ट होने वाले शहरों में अनूपपुर, उमरिया, सिंगरौली, शहडोल, डिंडोरी, बंडा, भिंड, बीना, दतिया, गुना, ग्वालियर, मैहर, मनासा, मुरैना, मऊगंज, रीवा, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर और मुलताई शामिल हैं।
अन्य शहरों से कनेक्टिविटी में आलीराजपुर से आगर मालवा, मंदसौर, शाजापुर; बड़वानी से आगर मालवा, मंदसौर, शाजापुर; बुरहानपुर से नीमच, रतलाम, शाजापुर; धार से पचमढ़ी; खंडवा से शाजापुर, आगर मालवा, नीमच, मंदसौर; और खरगोन से आगर मालवा, मंदसौर, नीमच शामिल हैं।
यात्रियों को मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं
हर बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य होगा। बस की पल-पल की लोकेशन राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की निगरानी में रहेगी। बसों का समय, किराया और सीटों की उपलब्धता मोबाइल ऐप पर लाइव देखी जा सकेगी, जिस तरह ‘वेयर इज माय ट्रेन’ ऐप पर देखा जा सकता है। किराया लेने के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग प्रणाली का उपयोग होगा, जिससे अतिरिक्त शुल्क की समस्या समाप्त होगी। यात्रियों की समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए ऑनलाइन शिकायत निवारण सिस्टम काम करेगा।
ट्रायल और भविष्य की योजनाएं
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का ट्रायल शुरू हो चुका है। धीरे-धीरे बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इंटर-सिटी में 200 और इंट्रा-सिटी के तहत 80 बसें चलाई जाएंगी। इस सेवा के लिए अत्याधुनिक बस टर्मिनलों का निर्माण, डिजिटल ट्रैकिंग, ड्राइवरों-कंडक्टरों पर प्रभावी निगरानी के साथ सड़क सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस सिस्टम, पैनिक बटन के साथ रियल टाइम मॉनिटरिंग रहेगी। इलेक्ट्रॉनिक व सीएनजी बसों को प्राथमिकता दी जाएगी। एआईसीटीएसएल के सीईओ अर्थ जैन ने बताया कि इसमें पांच से छह पुराने ऑपरेटर और चार से पांच नए ऑपरेटर शामिल हैं।

