BREAKING NEWS
2026-10-17

वर्ष 2026 में प्रदेश में खसरे का संक्रमण बढ़ा, बालाघाट में 26 बच्चों की जान गई; भिंड में सर्वाधिक 125 मामले

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

बालाघाट जिले में खसरा, मलेरिया और कुपोषण के संयुक्त प्रकोप के कारण 26 बच्चों की मृत्यु हो गई है।

Advertisement

प्रदेश में खसरे के बढ़ते मामले

पिछले वर्ष प्रदेश में खसरे के कुल 1,800 मरीज मिले थे। इस वर्ष के शुरुआती आठ महीनों में ही यह आंकड़ा 1,450 से अधिक पहुंच गया है। यदि यही गति बनी रही, तो वर्ष के अंत तक मरीजों की संख्या ढाई हजार तक पहुंच सकती है।

जिलावार स्थिति

जुलाई से अगस्त के बीच बालाघाट में 40 से अधिक संक्रमित व्यक्ति मिले हैं। भिंड में खसरे के सर्वाधिक 125 मामले दर्ज किए गए हैं। शिवपुरी और ग्वालियर में भी लगभग 90-90 रोगी चिह्नित किए गए हैं।

संक्रमण का मौसमी पैटर्न

खसरे के सबसे अधिक मामले आमतौर पर गर्मी के मौसम में सामने आते हैं। सितंबर से संक्रमण का दूसरा दौर शुरू होता है, हालांकि इसकी तीव्रता गर्मी की तुलना में कम रहती है। लोगों को खसरा के प्रति सतर्क और जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 16 मार्च को खसरा दिवस मनाया जाता है।

खसरे के संक्रमण का चार-वर्षीय चक्र

पूर्व राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर संतोष शुक्ला के अनुसार, आम की बौर की तरह खसरे का संक्रमण भी हर चौथे वर्ष बढ़ता है। यह पैटर्न सालों से देखा जा रहा है, हालांकि आम की बौर का खसरे से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन दोनों लगभग साथ-साथ चलते रहे हैं। वर्ष 2022 में खसरे का संक्रमण बढ़ा था और अब वर्ष 2026 में भी मामले बढ़े हैं।

रोकथाम और उपचार

शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, खसरे का संक्रमण एक रोगी से 20 अन्य लोगों तक फैल सकता है। इस पर नियंत्रण का सबसे कारगर तरीका बीमारी की तुरंत पहचान कर उसका उपचार और रोकथाम करना है। पहला मामला सामने आने के साथ ही इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तक पहुंचनी चाहिए। 24 घंटे के भीतर इसके प्रसार को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए। इस बीमारी में सर्दी-जुकाम, तेज बुखार के साथ शरीर में लाल चकत्ते निकलते हैं। उपचार न मिलने पर 30 प्रतिशत तक मृत्यु का जोखिम रहता है। खसरा के कारण कुपोषण सहित कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं। इससे बचने का सबसे कारगर उपाय टीकाकरण है। फील्ड सर्वे कराकर यह देखा जाना चाहिए कि बच्चों को टीका लगा है या नहीं। उसी के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण करना चाहिए, ऐसा शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व डायरेक्टर, एनएचएम, डॉ. पंकज शुक्ला ने कहा।