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2026-10-17

सिंहस्थ 2028: ओंकारेश्वर में एक करोड़ श्रद्धालुओं के लिए नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की चुनौती

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, खंडवा।

सिंहस्थ 2028 में तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में लगभग एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। प्रशासन इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सड़क, पार्किंग, पैदल पुल, मंदिर परिसर, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इन तैयारियों के बीच, संचार व्यवस्था को सबसे अहम जरूरतों में शामिल होने के बावजूद फिलहाल हाशिए पर देखा जा रहा है। वर्तमान में ही शनिवार, रविवार और विशेष पर्वों पर भीड़ बढ़ने पर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवा प्रभावित होने लगती है। सिंहस्थ के दौरान यदि नेटवर्क क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो इसका सीधा असर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, संपर्क और डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर पड़ सकता है।

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ओंकारेश्वर में वर्तमान में भीड़ के दौरान कई बार मोबाइल पर बात करना मुश्किल हो जाता है। इंटरनेट की गति प्रभावित होने से ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल सेवाओं में भी परेशानी आती है। सिंहस्थ में भीड़ कई गुना बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के अपने परिजनों से संपर्क न कर पाने की स्थिति में आपात स्थिति में सूचना पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण होगा। भीड़ प्रबंधन में मोबाइल आधारित सूचना, लोकेशन शेयरिंग, डिजिटल भुगतान और प्रशासनिक संचार की भूमिका को देखते हुए नेटवर्क क्षमता बढ़ाना आवश्यक होगा। किसी आपात स्थिति में सहायता व अन्य व्यवस्था में नेटवर्क का अभाव परेशानी का कारण बन सकता है।

जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की गई हैं। इनमें घर बैठे ज्योतिर्लिंग दर्शन-पूजन, शीघ्र दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग सेवा सहित अन्य ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, नेटवर्क की समस्या के कारण इन सेवाओं का लाभ श्रद्धालुओं को सही ढंग से नहीं मिल पाता है। कई बार वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए बुकिंग मैसेज भेजने में भी परेशानी होती है, और श्रद्धालुओं को व्हाट्सएप पर मैसेज प्राप्त नहीं हो पाते हैं। आम दिनों में ट्रैफिक कम रहने के कारण निजी कंपनियां यहां टावर स्थापित करने में रुचि नहीं लेती हैं। वर्तमान में एक निजी कंपनी और बीएसएनएल उपभोक्ताओं को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पुनासा के एसडीएम और मंदिर ट्रस्ट के प्रभारी सीईओ पंकज वर्मा ने बताया कि नेटवर्क की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

सिंहस्थ के लिए परियोजनाएं

सिंहस्थ के लिए ओंकारेश्वर में श्रद्धालु सुविधा और भीड़ प्रबंधन से संबंधित कुल 46 परियोजनाओं की लागत 938.43 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इनमें से अभी 21 परियोजनाओं पर कार्य शुरू हुआ है, जिनकी लागत लगभग 247.14 करोड़ रुपये है। वहीं, 20 कार्य ऐसे हैं जिनके प्रस्ताव स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं। प्रस्तावित बड़े कार्यों में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर विकास पर 160 करोड़ रुपये, ममलेश्वर मंदिर परिसर विकास पर लगभग 119 करोड़ रुपये, ओंकार सर्किट पर 70 करोड़ रुपये, नया होटल पर 50 करोड़ रुपये और कुबेर भंडारी पार्किंग पर 38 करोड़ रुपये शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, बायपास सड़क, सीसी रोड, अस्पताल, पार्किंग, ट्रेंचिंग ग्राउंड, फूड कोर्ट और सुरक्षा से जुड़े कार्य भी प्रस्तावित हैं।

स्वीकृति के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण कार्य अभी शुरू नहीं हुए हैं। इनमें ममलेश्वर सेतु के पास हाई लेवल पैदल पुल, जेपी चौक के पास नया हाई लेवल पैदल पुल और ओंकार घाट से सिद्धवरकूट तक अप्रोच रोड सहित पैदल पुल शामिल हैं, जिनकी कुल लागत करोड़ों रुपये है। इसके अलावा, पुलिस वॉच टावर और 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का कार्य भी प्रस्तावित है।

अधिकारियों के बयान

सिंहस्थ की तैयारियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही, पार्किंग, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के साथ संचार नेटवर्क को भी भीड़ प्रबंधन की मूलभूत जरूरत के रूप में शामिल करने की आवश्यकता है। यदि मोबाइल टावरों की क्षमता बढ़ाने, अस्थायी नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और आपातकालीन संचार व्यवस्था की पहले से योजना नहीं बनी तो भीड़ के दौरान सड़क और पार्किंग व्यवस्था बेहतर होने के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए संपर्क और डिजिटल सेवाओं का संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए सिंहस्थ की तैयारियों में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि एक करोड़ संभावित श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए ओंकारेश्वर का मोबाइल नेटवर्क कितना तैयार है और नेटवर्क फेल होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार व्यवस्था क्या होगी।

एडीएम और सिंहस्थ नोडल अधिकारी श्रद्धा शुक्ला ने बताया कि ओंकारेश्वर में नेटवर्क की समस्या का निराकरण करने के लिए बीएसएनएल के साथ चर्चा चल रही है, जिसका जल्द ही समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सिंहस्थ के लिए स्वीकृत कार्य शुरू हो चुके हैं और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से प्रतिदिन प्रगति की निगरानी की जा रही है। जिन 20 कार्यों के प्रस्ताव लंबित हैं, उन्हें कमिश्नर स्तर पर भेजा गया है, और स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे।