BREAKING NEWS

Latest News

हाईकोर्ट ने केवल आशंका पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की, अवैध हिरासत का प्रमाण आवश्यक

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि केवल अवैध हिरासत की आशंका व्यक्त करने से याचिका स्वीकार्य नहीं होती; याचिकाकर्ता को प्रथमदृष्टया यह दिखाना होगा कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में किसी की अवैध हिरासत में है। रिंकू राजपूत द्वारा दायर इस याचिका में पत्नी के लापता होने और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप था, लेकिन कोर्ट ने पाया कि अवैध हिरासत का कोई प्रमाण या तथ्य पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने त्वरित जांच के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत वैकल्पिक कानूनी उपाय भी सुझाए।