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2026-08-07

बुरहानपुर कलेक्ट्रेट में सरपंच ने कीटनाशक पिया, MLA समेत तीन पर प्रताड़ना के आरोप

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, बुरहानपुर।

गुरुवार को बुरहानपुर कलेक्ट्रेट में सीतापुर गांव के सरपंच अमर सिंह मंडलोई ने प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता से आहत होकर इल्ली मारने वाली दवा पीकर आत्महत्या का प्रयास किया।

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आनंद-फानन में उनके पुत्र और अधिकारियों ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से शाम को उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सरपंच के पुत्र ने अधिकारियों को बताया कि बेहोश होने से पहले अमर सिंह ने पंचायत के पूर्व सचिव तुकाराम और नेपा विधायक मंजू दादू सहित तीन लोगों के नाम लिए थे। पुत्र के अनुसार, कथित लोगों द्वारा उनसे रुपयों की मांग की जा रही थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

फिलहाल, सरपंच अमर सिंह बेहोश हैं और कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं हैं।

इस घटना ने सीईओ जिला पंचायत सृजन वर्मा की प्रशासनिक कार्य क्षमता की खामियों को उजागर किया है।

सूत्रों के अनुसार, कीटनाशक पीने से पहले सरपंच अमर सिंह सीईओ सृजन वर्मा के पास भी गए थे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

सीईओ जिला पंचायत सृजन वर्मा ने इस मामले में कहा कि कीटनाशक पीने वाले सरपंच अपनी पंचायत में मनचाहा सचिव चाहते थे। उन्होंने बताया कि हाल ही में सीतापुर के पूर्व सचिव को दस साल हो जाने के कारण हटाया गया था और उनके स्थान पर दूसरा सचिव भेजा गया है।

सीईओ वर्मा के अनुसार, महज एक सचिव की नियुक्ति जैसी छोटी बात के लिए सरपंच द्वारा कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास करना किसी के गले नहीं उतर रहा है।

डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला ने बताया कि सरपंच अमर सिंह की हालत फिलहाल नाजुक है। बेहोश होने के कारण उनके बयान दर्ज नहीं किए जा सके हैं।

अधिकारियों के अनुसार, सरपंच के होश में आने और बयान देने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी और यह स्थिति स्पष्ट होगी कि उन्होंने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया था।

उल्लेखनीय है कि जिले में कुल 167 पंचायतें हैं, जिनमें से कई में स्थाई सचिव नहीं हैं। कई सचिवों को दो से तीन पंचायतों का प्रभार दिया गया है। करीब एक साल से जिला पंचायत की कमान संभाल रहे सीईओ सृजन वर्मा ने पंचायतों के कामकाज को सरल बनाने और कर्मचारियों की कमी को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया।

इसके साथ ही, उन पर कर्मचारियों व अन्य लोगों के फोन नहीं उठाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। समस्याएं लेकर जिला पंचायत पहुंचने वाले लोगों को उनसे भेंट करने के लिए घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है।