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मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, बांधों में जलस्तर घटने से उत्पादन प्रभावित

मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण बिजली संकट गहरा गया है। पर्याप्त बारिश न होने से बांधों में जलस्तर कम हो गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में प्रतिदिन 13 से 14 हजार मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग को पूरा करने में कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सामान्य स्थिति की तुलना में 2400 से 2500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो गया है। इस कमी की भरपाई के लिए ताप विद्युत संयंत्रों और बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसके लिए मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी करीब दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय कर रही है।

मध्य प्रदेश में कम बारिश से बिजली की मांग 30% बढ़ी, जलविद्युत उत्पादन एक-चौथाई हुआ

मध्य प्रदेश में इस वर्ष कम बारिश के कारण बिजली क्षेत्र पर सीधा असर पड़ा है। बिजली की मांग में लगभग 30% की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि जलविद्युत उत्पादन घटकर लगभग एक-चौथाई रह गया है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को अधिकतम मांग 13,471 मेगावॉट तक पहुँच गई, जो एक साल में 3,076 मेगावॉट की वृद्धि दर्शाती है। जलविद्युत उत्पादन में कमी के कारण राज्य को एनटीपीसी से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिसका बोझ आम जनता पर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती के भी आरोप लगे हैं।