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2026-07-31

महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों में जंक फूड की बिक्री और प्रचार पर प्रतिबंध लगाया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, महाराष्ट्र।

बच्चों में बेहतर खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने स्कूलों के भीतर और आसपास जंक फूड की बिक्री, मुफ्त वितरण तथा प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया है।

प्रतिबंध का दायरा

नए आदेश के अनुसार, अधिक वसा, चीनी और नमक (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थ, जिनमें वसा, कृत्रिम वसा, चीनी तथा नमक की मात्रा अधिक होती है, अब स्कूल परिसर या उसके 50 मीटर के दायरे में न तो बेचे जा सकेंगे, न मुफ्त बांटे जा सकेंगे और न ही उनका प्रचार किया जा सकेगा। यह नियम राज्य के सभी प्रकार के स्कूलों पर लागू होगा, जिनमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, आवासीय, सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड से जुड़े विद्यालय शामिल हैं। इस आदेश से लगभग 1.08 लाख स्कूलों और करीब 2 करोड़ छात्रों पर प्रभाव पड़ेगा।

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नए नियम के अंतर्गत वड़ा पाव, समोसा, डीप फ्राइड स्नैक्स, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, मीठे पेय पदार्थ, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसी खाद्य वस्तुएं स्कूलों तथा उनके आसपास 50 मीटर के क्षेत्र में नहीं बेची जा सकेंगी।

एफडीए आयुक्त का बयान

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बुधवार को इस आदेश की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह कदम राज्य में चल रहे ‘सुरक्षित भोजन-सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान का एक हिस्सा है। आयुक्त मुंढे ने यह भी कहा कि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य महाराष्ट्र के हर बच्चे तक सुरक्षित भोजन पहुंचाना है, जिससे स्वस्थ खान-पान की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायता मिलेगी।

स्कूलों के लिए नए नियम

इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह नियम सभी शिक्षा बोर्डों पर समान रूप से लागू होगा। अब स्कूल कैंटीन, हॉस्टल कैंटीन, मिड-डे मील (पीएम-पोषण) रसोई, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों को भोजन आपूर्ति करने वाले सभी विक्रेताओं के पास वैध एफएसएसएआई लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होगा।

स्कूलों को कई कदम उठाने होंगे, जिनमें खाद्य सुरक्षा सूचना बोर्ड लगाना, खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षक नियुक्त करना और ‘ईट राइट स्कूल’ अभियान लागू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्हें स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा तथा सुरक्षित पीने के पानी, साफ रसोई, भोजन के सही भंडारण और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

निगरानी और कार्रवाई

आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि इन नियमों को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधन की होगी। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में इन नियमों की निगरानी स्कूल शिक्षा विभाग करेगा, जबकि अन्य शिक्षा बोर्ड और स्थानीय निकाय अपने स्तर पर निगरानी करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि एफडीए जल्द ही पूरे राज्य में निरीक्षण अभियान शुरू करेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को नोटिस, लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई, खाद्य सामग्री जब्त करने और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

जागरूकता एवं दीर्घकालिक लक्ष्य

मुंढे ने आगे कहा कि इस आदेश का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। इस हेतु जिला और तालुका स्तर पर स्कूल प्रबंधन के साथ कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें ‘ईट राइट स्कूल’ अभियान के माध्यम से बच्चों को पौष्टिक भोजन के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाएगा। यह आदेश भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020 को लागू करता है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में मोटापा, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा कम करने में सहायता मिलेगी, साथ ही स्कूलों में स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित होंगी।