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2026-08-01

भोपाल रेलवे स्टेशन यार्ड का होगा पुनर्गठन, ट्रेनों की आवाजाही होगी सुगम

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल रेलवे स्टेशन के यार्ड को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यार्ड रीमॉडलिंग के पहले चरण में प्लेटफॉर्म नंबर-1 में बड़ा बदलाव किया जाएगा।

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प्लेटफॉर्म-1 में बदलाव और लागत

इसके तहत रानी कमलापति स्टेशन की ओर प्लेटफॉर्म-1 का विस्तार किया जाएगा, जबकि बीना की ओर प्लेटफॉर्म के एक हिस्से को हटाया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य दोनों सिरों पर मेन लाइन को चालू करना है, ताकि ट्रेनों के संचालन में अधिक सुविधा मिल सके। इस काम पर लगभग ₹71.80 लाख खर्च होंगे और इसे छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

संरचनात्मक सुधार

रीमॉडलिंग के तहत प्लेटफॉर्म नंबर-1 को रानी कमलापति स्टेशन की तरफ बढ़ाया जाएगा। इससे प्लेटफॉर्म की संरचना को यार्ड की नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। रेलवे की योजना के अनुसार प्लेटफॉर्म और ट्रैक की स्थिति में बदलाव कर ट्रेनों के संचालन के लिए बेहतर व्यवस्था बनाई जाएगी।

बीना छोर से हटेगा हिस्सा

प्लेटफॉर्म-1 के बीना छोर की तरफ बने हिस्से को हटाया जाएगा। इसके पीछे मुख्य वजह यार्ड की ट्रैक व्यवस्था में बदलाव करना है। प्लेटफॉर्म के इस हिस्से को हटाने के बाद दोनों छोर से मेन लाइन को चालू करने के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध हो सकेगी। इससे यार्ड में ट्रेनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

ट्रेनों के संचालन में सुविधा

भोपाल यार्ड में ट्रैक और प्लेटफॉर्म की मौजूदा व्यवस्था के कारण ट्रेनों के संचालन में कई स्तर पर समन्वय करना पड़ता है। रीमॉडलिंग के बाद मेन लाइन को दोनों तरफ से चालू करने की व्यवस्था होने से ट्रेनों को प्लेटफॉर्म और यार्ड से निकालने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे भविष्य में ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

यात्रियों को लाभ

यात्रियों को ट्रेनों की बेहतर आवाजाही का लाभ मिलेगा, क्योंकि यार्ड का ढांचा सुधरने से ट्रेनों का आना-जाना अधिक व्यवस्थित होगा। प्लेटफॉर्म-1 की नई व्यवस्था से ट्रेनों को खड़ा करने और रवाना करने में सुविधा मिलेगी। ट्रैक बेहतर होने से ट्रेनों को यार्ड में अनावश्यक रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे लेत-लतीफी कम होगी। दोनों तरफ मेन लाइन शुरू होने से ट्रेनों के संचालन के लिए नए विकल्प मिलेंगे, जिससे क्षमता में बढ़ोतरी होगी। नए ट्रैक और संरचना से पूरे स्टेशन यार्ड की कार्यप्रणाली बेहतर होगी।