बुलंद सोच, भोपाल।
भोपाल में 198 पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल सहित अन्य व्यवस्थाओं की जांच के लिए आठ एसडीएम व तहसीलदार के दलों का गठन किया गया है। गोविंदपुरा वृत्त के दल ने बुधवार को मेसर्स दम्मो फिलिंग स्टेशन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ।
इंडियन ऑयल (आईओसीएल) कंपनी के इस पंप पर ग्राहकों को पानी मिला डीजल बेचा जा रहा था, जिससे जांच दल ने डीजल टैंक व चार नोजल सील करने की कार्रवाई की है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेश पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय के आयुक्त ने जिले में सभी पेट्रोल पंपों की जांच के लिए दल गठित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम प्रकाश नायक ने आठ दलों का गठन किया।
गोविंदपुरा दल में सहायक आपूर्ति अधिकारी अशोक सत्यार्थी, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सफदर खान और इंडियन ऑयल के सेल्स अधिकारी तरुण अग्रवाल शामिल थे। इस दल ने बुधवार को गोविंदपुरा रचना नगर के पास स्थित मेसर्स दम्मो फिलिंग स्टेशन का औचक निरीक्षण किया।
दल ने जब टैंक पर ग्राहकों को दिए जा रहे डीजल का परीक्षण किया तो उसमें पानी मिले होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद दल ने मौके पर ही 9,787 लीटर डीजल जब्त कर लिया, जिसमें करीब 100 लीटर पानी मिला हुआ था।
इसके बाद दल ने पेट्रोल भंडारण सहित अनेक सुविधाओं की भी जांच की, जिसमें तमाम अनियमितताएं मिली हैं। इनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही कलेक्टर न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जांच दल ने पेट्रोल पंप पर भंडारण का रिकॉर्ड देखा तो पांच महीने – दिसंबर, मार्च, मई, जून और जुलाई में 3,000 लीटर अधिक पेट्रोल का भंडारण दर्ज होना मिला। अधिकारियों ने बताया कि पेट्रोल पंप पर 20 हजार लीटर से अधिक पेट्रोल का भंडारण नहीं किया जा सकता है, जबकि यहां रिकॉर्ड में 23 हजार लीटर पेट्रोल दर्ज होना मिला।
दल ने सामान्य पेट्रोल व एक्स्ट्रा प्रीमियम 95 पेट्रोल में इथेनॉल की जांच की, जिससे दोनों में 20 प्रतिशत इथेनॉल होने की पुष्टि हुई। हालांकि पंप संचालक द्वारा ई-20 पेट्रोल बेचने की जानकारी चस्पा की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
पंप पर हवा, पानी और शौचालय आदि सुविधाओं की जांच में वाटर कूलर में कचरा व गंदगी मिली, जिससे ग्राहकों के पीने के लिए पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा था।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दल जब जांच करने पहुंचा तो क्षेत्रीय नापतौल निरीक्षक मौके पर नहीं पहुंचे। साथ ही मौके पर मौजूद इंडियन ऑयल कंपनी के एरिया सेल्स अधिकारी तरुण अग्रवाल ने जांच के दौरान कोई संभव मदद नहीं की, जिस वजह से दल को पंप पर जांच व परीक्षण करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा।

