सागा ग्रुप द्वारा निवेश के नाम पर मध्य प्रदेश में 2 लाख से अधिक लोगों से 492 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा की जांच में पता चला है कि समूह के प्रबंध निदेशक समीर अग्रवाल ने 10 कंपनियां बनाकर देशभर में 30 लाख लोगों से ठगी की है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय भी मामले की जांच कर रहे हैं। ईडी ने हाल ही में 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर, नकदी और ज्वेलरी जब्त की थी। समीर अग्रवाल देश छोड़कर जा चुका है, जिसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जबलपुर में एक युवक को ऑनलाइन होटल रेटिंग के नाम पर घर बैठे कमाई का झांसा देकर साइबर ठगों ने 37 लाख 423 रुपये ठग लिए। ठगों ने शुरुआत में छोटे टारगेट पूरे करने पर मुनाफा देकर युवक का भरोसा जीता, फिर रिचार्ज और अधिक मुनाफे के नाम पर उससे लगातार पैसे जमा करवाए। युवक ने अपने, पत्नी और परिचितों के खातों से लाखों रुपये ट्रांसफर किए। पैसे ऐंठने के बाद ठगों ने संपर्क तोड़ दिया और उसे ब्लॉक कर दिया। अधारताल पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मंदसौर की कृषि उपज मंडी में लहसुन व्यापारी शंकरलाल हरजानी के साथ धोखाधड़ी हुई है। उनकी फर्म सांई कृष्णा इम्पेक्स से 23 अगस्त को 136 क्विंटल 85 किलो लहसुन पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के लिए एक ट्रक (एचआर-39 जी-8686) में लोड की गई थी। यह ट्रक रास्ते से ही लहसुन सहित गायब हो गया। व्यापारी के पुत्र संजय हरजानी ने बताया कि चालक ने मोबाइल बंद कर लिया और लहसुन गंतव्य तक नहीं पहुंची। जांच में ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी निकला, जबकि उसका असली नंबर एमपी-09 बीएम-4221 था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इंदौर के आजाद नगर निवासी वारिस शेख पर एक हिंदू युवती का शोषण और ब्लैकमेल करने का आरोप लगा है। युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि आरोपित 2020 में उससे वीरु बनकर मिला था और मोबाइल फाइनेंस करवाया। आरोपित ने उसे होटल ले जाकर संबंध बनाए और उसके फोटो ले लिए। बाद में युवती को पता चला कि उसका असली नाम वारिस है और वह शादीशुदा है, जिसके बाद उसने संबंध तोड़ लिए। अब आरोपित फोटो के माध्यम से ब्लैकमेल कर रहा है। पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपित की गिरफ्तारी के लिए टीम भेजी है।
झाबुआ के पेटलावद क्षेत्र से जुड़े 2934 करोड़ रुपये के कथित साइबर फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पेटलावद के रूपगढ़ निवासी सह-आरोपी विनोद कुमार राठौर को 22 अगस्त को गिरफ्तार किया। यह फर्जीवाड़ा शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर किया जा रहा था। मुख्य आरोपी अनुराग अरविंद श्रीवास्तव को 31 जुलाई 2026 को नागपुर से पकड़ा गया था। इस गिरोह ने फर्जी स्क्रीनशॉट और ‘एसीआई सेंचुरी’ ऐप का उपयोग कर निवेशकों को धोखा दिया। जांच में दो करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं और 3087 ऑनलाइन शिकायतें सामने आई हैं।
भोपाल में एमपी नगर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगता था। आरोपी की पहचान झांसी निवासी ऋषि कुमार यादव के रूप में हुई है, जो 2016 बैच का आईपीएस अधिकारी होने का दावा करता था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी आईपीएस पहचान पत्र, नकली दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पीड़ित युवाओं को जॉइनिंग लेटर में स्पेलिंग की गलतियों से ठगी का पता चला, जिसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब अन्य शहरों में भी ठगी के मामलों की जांच कर रही है।
शहर में 11 अक्टूबर को होने वाले भारत-वेस्टइंडीज इंटरनेशनल टी-20 मैच के टिकटों की फर्जी बिक्री सोशल मीडिया पर शुरू हो गई है। साइबर ठग टिकटों की दरें और बिक्री की तारीख तय होने से पहले ही गलत जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। एमपीसीए ने क्रिकेट प्रेमियों को सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि टिकटों की कीमत 800 से 7 हजार रुपए तक बताई जा रही है और गलत खिलाड़ी प्रोफाइल भी दर्शाई जा रही है। एमपीसीए सचिव ने पुष्टि की कि टिकट बिक्री शुरू नहीं हुई है, और क्राइम ब्रांच भी पिछली धोखाधड़ी को देखते हुए गाइडलाइन तैयार करने की योजना बना रही है।
मध्य प्रदेश में हाल ही में पांच फर्जी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने लाखों रुपये की ठगी की। इनमें तृप्ति सिंह राजपूत ने खुद को आईएएस और MPSTDC की एडिशनल डायरेक्टर बताया, वहीं आठवीं पास विकास गौतम ने सोशल मीडिया पर खुद को आईपीएस अधिकारी दर्शाया। एम.टेक पासआउट ऋषि कुमार यादव ने गलत स्पेलिंग वाले नियुक्ति पत्र के कारण पोल खुलने पर गिरफ्तारी हुई। हिमांशु पांचाल ने ‘आईएएस राज सोनी’ बनकर इंदौर के होटलों और ड्राइवरों को निशाना बनाया। दिल्ली निवासी अतुल कुमार ने खुद को नागरिक उड्डयन मंत्रालय का संयुक्त सचिव बताकर उज्जैन के महाकाल मंदिर में वीआईपी सुविधा का दबाव बनाया।
जबलपुर में ऑनलाइन ठगी के चार अलग-अलग मामलों में अज्ञात ठगों ने चार लोगों के खातों से कुल 5 लाख 65 हजार 888 रुपये निकाल लिए हैं। पीड़ितों में विक्टोरिया जिला अस्पताल के नेत्र सहायक चिकित्सक, एक निजी कंपनी के कर्मचारी और 82 वर्षीय बुजुर्ग शामिल हैं। गोरखपुर, गढ़ा और गुप्तेश्वर थानों में इन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। ठगों ने मोबाइल सुधारने, फर्जी ऐप डाउनलोड करवाने और सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने के झांसे में फंसाकर इन वारदातों को अंजाम दिया।
सागर सिविल लाइन पुलिस ने फर्जी नायब तहसीलदार बनकर ठगी करने वाले शिवम चतुर्वेदी निवासी गढ़ाकोटा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से नायब तहसीलदार पद का फर्जी आई-कार्ड, सील और कूटरचित दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपी ने एक व्यक्ति को शासकीय काम के लिए गाड़ी की आवश्यकता बताकर झांसा दिया और 1.05 लाख रुपए प्रतिमाह के फर्जी एग्रीमेंट पर उसकी नई बोलेरो पांच साल के लिए ले ली थी। फरियादी को संदेह होने पर आरोपी मौके से भाग निकला था। पुलिस उसके फरार साथी अमित की तलाश कर रही है। शिवम चतुर्वेदी पहले भी ठगी के मामलों में पकड़ा जा चुका है।