रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने रीवा एयरपोर्ट पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत 80 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करता है, ऐसे में शुद्ध पेट्रोल देश में उपलब्ध नहीं है। सांसद ने वैश्विक तेल आपूर्ति चुनौतियों, ब्राजील में 100% एथेनॉल उपयोग, और विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए एथेनॉल मिश्रण का समर्थन किया। उन्होंने देश में उच्च रोजगार और कम महंगाई दर का भी उल्लेख किया। मिश्रा पूर्व में भी मोबाइल की लत, प्रधानमंत्री मोदी की दाढ़ी और 1947 के बंटवारे जैसे विषयों पर विवादित बयान दे चुके हैं।
मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में कुलपति पद के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य करने वाली शर्त से राज्य सरकार पीछे हटेगी। सरकार ने हाई कोर्ट में बताया कि इस प्रावधान को हटाने के लिए विधानसभा में नया विधेयक लाया जाएगा, जिसके बाद कुलपति नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था फिर लागू होगी। हाई कोर्ट ने सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए विस्तृत जवाब मांगा है।
राज्य सरकार ने दो महत्वपूर्ण कृषि सेवाओं, मिट्टी के नमूनों की जांच और बीज की पड़ताल को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से हटा दिया है। अब इन जांचों की रिपोर्ट देने के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं होगी, जबकि पहले इसके लिए क्रमशः 30 और 60 दिन की समय-सीमा थी। अधिकारियों ने कृषि प्रयोगशालाओं पर अधिक दबाव, सीमित संसाधनों और वैज्ञानिक प्रक्रिया को समय पर रिपोर्ट न दे पाने का कारण बताया है। इस निर्णय के बाद किसान निर्धारित अवधि में रिपोर्ट के लिए कानूनी दावा नहीं कर सकेंगे और लोक सेवा गारंटी कानून के तहत अपील या दंड का प्रावधान भी लागू नहीं होगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संसद द्वारा पारित पेपर लीक विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक केवल पेपर लीक होने के बाद की सजा और जुर्माने पर केंद्रित है, जबकि सरकार को पेपर लीक रोकने के ठोस उपायों पर ध्यान देना चाहिए। रांका ने परीक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार, परीक्षा कार्यक्रम और पाठ्यक्रम में पारदर्शिता, कोचिंग सेंटरों की जांच तथा डिजिटल जांच सहित पांच सूत्रीय मांगें रखीं। उन्होंने सरकार से छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बातचीत करने की भी अपील की।
महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में बेहतर खान-पान को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों के अंदर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री, मुफ्त वितरण और प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने घोषणा की कि यह नियम राज्य के 1.08 लाख स्कूलों और 2 करोड़ छात्रों पर लागू होगा, जिसमें वड़ा पाव, समोसा, चिप्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रतिबंधित हैं। यह ‘सुरक्षित भोजन-सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान का हिस्सा है। स्कूलों को खाद्य सुरक्षा सूचना बोर्ड लगाने, पर्यवेक्षक नियुक्त करने और ‘ईट राइट स्कूल’ अभियान लागू करने होंगे।
मध्यप्रदेश में लगभग 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने के बावजूद समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और चरणबद्ध नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है। नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति सहित कई लाभ मिलते हैं, जबकि संविदा कर्मचारियों का वेतन 8 हजार से 30 हजार रुपये तक सीमित है और उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं मिलती। विशेषज्ञों ने संविदा नियुक्तियों के बढ़ते दायरे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट नीति की आवश्यकता जताई है।
मध्य प्रदेश सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। ‘प्रवेश नियम-2026’ के तहत 8 साल बाद 30% ‘मैनेजमेंट कोटा’ फिर से शुरू होगा, जिसे भविष्य में 35% तक बढ़ाया जा सकता है। 15% एनआरआई कोटा बरकरार रहेगा, जबकि शेष 55% सीटें सामान्य काउंसलिंग से भरी जाएंगी। इस नीति से सरकारी खजाने को प्रति वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है, क्योंकि सरकार को मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे के छात्रों की फीस नहीं देनी होगी। हालांकि, इससे मेडिकल शिक्षा महंगी होने की आशंका है, क्योंकि मैनेजमेंट सीटों की फीस सामान्य सीटों से कई गुना अधिक होगी।