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2026-07-31

पुलिस से बहस शासकीय कार्य में बाधा नहीं, पूर्व विधायक वानखेड़े सहित आठ दोषमुक्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

विशेष न्यायालय (एमपी-एमएलए) ने आगर-मालवा जिले के बड़ौद थाना क्षेत्र में शासकीय कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों को धमकाने के मामले में पूर्व विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित आठ आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि किसी मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि या आम नागरिक का पुलिस अधिकारियों से बहस या तर्क-वितर्क करना मात्र शासकीय कार्य में बाधा का अपराध नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि लोक सेवक पर हमला किया गया हो या उसके विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग किया गया हो।

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मामले का घटनाक्रम और साक्ष्य परीक्षण

यह मामला 23 नवंबर 2020 का है। बड़ौद थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन विधायक विपिन वानखेड़े अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और शासकीय कार्य में बाधा डाली। पुलिस ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभिलेखों पर उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूरे घटनाक्रम का सूक्ष्मता से परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत वीडियो फुटेज में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि आरोपितों ने थाना प्रभारी या किसी अन्य पुलिसकर्मी के साथ धक्का-मुक्की अथवा हाथापाई की थी।

दोषमुक्ति का आधार

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किसी विषय को लेकर जनप्रतिनिधियों या आम नागरिकों का पुलिस अधिकारियों से वाद-विवाद या तर्क-वितर्क करना अपने आप में अपराध नहीं है। जब तक यह सिद्ध न हो कि आरोपित ने किसी लोक सेवक पर हमला किया या उसके विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग किया, तब तक शासकीय कार्य में बाधा का अपराध नहीं बनता। न्यायालय ने यह भी कहा कि घटना के स्पष्ट और प्रत्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध होने की संभावना थी, लेकिन ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पर्याप्त और स्पष्ट साक्ष्य के अभाव में पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े सहित सभी आठ आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।