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भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली, 1.50 लाख मामले लंबित

भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली होने के कारण न्याय की गति धीमी पड़ गई है, जिससे लगभग 1.50 लाख मामले लंबित हैं। स्वीकृत 112 पदों में से केवल 66 जज ही कार्यरत हैं, जिसके चलते प्रत्येक अदालत पर 4 से 6 हजार मामलों का बोझ है। 20% से अधिक मामले 5 से 10 साल पुराने हैं। नए जजों के लिए पर्याप्त कोर्टरूम नहीं हैं; 10 कोर्टरूम को विधिक सेवा प्राधिकरण भवन में स्थानांतरित करना पड़ा है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पुरानी जेल की जमीन पर प्रस्तावित नई मल्टी-स्टोरी अदालत भवन परियोजना भी हाउसिंग बोर्ड के प्रस्ताव और जेल विभाग की कैदी शिफ्टिंग के कारण अटकी हुई है।

सरकारी काम के लिए निजी संसाधन: हाई कोर्ट ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर फैसला सुरक्षित रखा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सुनवाई पूरी हो गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकारी काम के लिए कर्मचारियों को निजी मोबाइल और इंटरनेट जैसे संसाधनों का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। मैहर जिले के सत्येंद्र सिंह तिवारी की याचिका में शिक्षकों को निजी संसाधन उपयोग करने की मजबूरी और व्यक्तिगत डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट के फैसले से ई-अटेंडेंस की जिम्मेदारी और निजी संसाधनों के उपयोग की सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट के दखल के बाद युवक पर दुष्कर्म और हनीट्रैप धमकी का मामला दर्ज

भोपाल में एक युवती ने एक युवक पर शादी का वादा कर दुष्कर्म करने और बाद में हनीट्रैप की धमकी देने का आरोप लगाया है। कमला नगर पुलिस ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया। पीड़िता ने 10 जुलाई को शिकायत की थी, लेकिन तत्काल कार्रवाई न होने पर उसे हाईकोर्ट जाना पड़ा। युवक ने भी युवती के खिलाफ सागर के महरौली थाने में अड़ीबाजी की शिकायत दर्ज कराई है और एक ऑडियो भी उपलब्ध कराया है, जिसमें युवती द्वारा रुपये मांगने का दावा है। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और साक्ष्यों की जांच कर रही है।

हत्या के आरोप में आजीवन कारावास भुगत रहे पिता-पुत्र दोषमुक्त: हाई कोर्ट ने अभियोजन की कहानी में पाईं विसंगतियां

जबलपुर हाई कोर्ट ने हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे राजेंद्र यादव और उनके बेटों सत्येंद्र व जितेंद्र यादव को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन की कहानी में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं। एक बेटा जितेंद्र यादव वारदात के समय झांसी के अस्पताल में भर्ती था, फिर भी उसे करीब 10 साल छह महीने जेल में रहना पड़ा। हाई कोर्ट ने पाया कि अज्ञात आरोपियों पर आगे की जांच का उल्लेख नहीं था, गवाहों के बयानों में विरोधाभास थे, और कथित हथियार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को नहीं दिखाए गए थे।

त्विषा शर्मा डेथ केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई

भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा डेथ केस में आरोपित पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर बुधवार, 12 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ के समक्ष यह मामला आएगा। गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने 25 जुलाई को खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया है। मृतका त्विषा शर्मा के पिता ने भी जमानत का विरोध करते हुए हाई कोर्ट में आपत्ति आवेदन पेश किया है। सोमवार और मंगलवार को नंबर न आ पाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट: पुलिस से जानकारी छिपाना अपराध की श्रेणी में

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लापता युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को आवश्यक जानकारी जानबूझकर छिपाना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आ सकता है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी 11 अगस्त 2026 को राधा प्रजापति की याचिका पर की। राज्य सरकार ने बताया कि प्रतिवादी, युवक का दादा, सहयोग नहीं कर रहा है, जबकि प्रतिवादी ने तथ्यों को छिपाने और वैवाहिक विवाद का दावा किया। पुलिस ने युवक को तीन दिन में बरामद कर कोर्ट में पेश करने की उम्मीद जताई है। अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को होगी।

न्याय व्यवस्था में दिव्यांगों के लिए समावेशी मॉडल; ब्रेल लिपि में मिलेगी कानूनी जानकारी

इंदौर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) द्वारा आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में दिव्यांगों के लिए न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में कानूनी जानकारी वाली विशेष गाइड ‘स्पर्श’ का विमोचन हुआ। मूक-बधिर प्रतिभागियों के लिए कार्यक्रम का लाइव भारतीय सांकेतिक भाषा में अनुवाद किया गया, और NALSA का थीम सॉन्ग भी सांकेतिक भाषा में जारी हुआ।

हत्या मामले में 17 साल बाद हाईकोर्ट ने तीन भाइयों को बरी किया, एक की मौत

जबलपुर हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में करीब 17 साल तक आरोपी रहे मड़ियादो क्षेत्र के तीन भाइयों को बरी कर दिया है। अदालत ने जांच और अभियोजन पर सवाल उठाए। इस दौरान एक भाई की मौत हो गई, जबकि दो अन्य भाई दिल्ली में मजदूरी कर रहे हैं। परिवार ने लगभग दस साल जेल में बिताए और मुकदमे के कारण जमीन-जायदाद बेचनी पड़ी। परिवार को कानूनी राहत मिली है, लेकिन 17 वर्षों के नुकसान की भरपाई मुश्किल है।

महाराष्ट्र सरकार ने Sarvam AI के स्वदेशी समाधानों को दी मंजूरी

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी विभागों में Sarvam AI के स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधानों को लागू करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर दो वर्षों में 11.26 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे करीब 2,500 सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘इंडस’ एआई वर्कस्पेस बनेगा। Sarvam AI के समाधान भारत के सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होस्ट होंगे और इसमें ‘संवाद’, ‘सारस’ और ‘बुलबुल’ एआई मॉडल भी शामिल हैं। वहीं, ठाणे सत्र अदालत ने 40 वर्षीय इंजीनियर विकार जैनुद्दीन शेख को अपनी गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका और जांच में खामियां पाई गईं।

झारखंड छात्र आंदोलन: सरकारी नौकरी के सपने में मां का मंगलसूत्र बिका, खेत गिरवी

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्रों ने सरकारी नौकरी में निष्पक्षता और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया। कई युवा वर्षों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती परीक्षाओं में विवादों के कारण निराश हैं। कुछ छात्रों ने बताया कि उनकी पढ़ाई के लिए मां का मंगलसूत्र बिका और खेत गिरवी रखे गए। उनका कहना है कि अगर परीक्षाएं निष्पक्ष नहीं होंगी तो मेहनत का कोई मतलब नहीं। वे उम्र सीमा खत्म होने के डर से भी जूझ रहे हैं। आरती पांडेय और प्रदीप जैसे छात्र अपनी आपबीती सुनाते हुए निष्पक्षता की अपील कर रहे हैं।