मुंबई की द्रविता सिंह को आठ साल पहले हुए एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में अपनी चार उंगलियां गंवाने के बाद अब रेलवे दावा अधिकरण से 4.20 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। 7 फरवरी 2018 को एक लुटेरे के हमले के कारण वे चलती ट्रेन से गिरकर दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गई थीं। अधिकरण ने रेलवे के तर्कों को खारिज करते हुए इसे ‘अप्रत्याशित घटना’ माना और 9% वार्षिक ब्याज सहित मुआवजे का आदेश दिया। हालांकि, इस मामले में दर्ज आपराधिक केस की सुनवाई सत्र न्यायालय में अभी भी लंबित है। द्रविता ने हादसे के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई व करियर जारी रखा।
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने मॉडल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जमानत मांगी है। मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन दो न्यायाधीशों ने पारिवारिक संबंधों का हवाला देते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। मामला तीसरे न्यायालय को भेजा गया, जहां नियमित मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। गिरिबाला सिंह ने स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी 100 वर्षीय मां की देखभाल और घर की चोरी के बाद संपत्ति की देखरेख के लिए जेल से बाहर रहने की आवश्यकता बताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत हत्या एक जघन्य अपराध है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक नाबालिग की अपील खारिज करते हुए यह बात कही। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भादंसं की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा हत्या के लिए न्यूनतम सजा है, इसलिए यह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रारंभिक मूल्यांकन के विरुद्ध अपील में हर मामले में मनोवैज्ञानिकों की सलाह अनिवार्य नहीं है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी से सरकारी नौकरी पाने वालों को कानून का संरक्षण नहीं मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी से प्राप्त नियुक्ति शुरू से ही अवैध मानी जाएगी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धोखाधड़ी हर कानूनी प्रक्रिया को खत्म कर देती है। तकनीकी आधार पर भी ऐसी कार्रवाई रद्द नहीं की जा सकती, और अदालत का उद्देश्य न्याय करना है, न कि गलत तरीके से लाभ लेने वालों को बचाना। यह फैसला फर्जी प्रमाण-पत्रों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।