BREAKING NEWS
2026-08-01

राजा रघुवंशी हत्याकांड: मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने शिलॉन्ग कोर्ट में सरेंडर किया, जेल भेजी गई

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, शिलॉन्ग।

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार को मेघालय की शिलॉन्ग ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम की जमानत रद्द करते हुए उन्हें तीन हफ्ते के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। सोनम ने यह अवधि पूरी होने से पहले ही सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद उन्हें पुनः जेल भेज दिया गया है।

Advertisement

सोनम के सरेंडर के बाद अब दो प्रमुख कानूनी सवाल सामने आए हैं। पहला यह कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल छह माह में पूरा करने का जो निर्देश दिया है, उसकी समय-सीमा सरेंडर की तारीख से मानी जाएगी या 23 जुलाई को पारित आदेश की तारीख से। दूसरा, क्या ट्रायल के दौरान सोनम दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं और यदि हां, तो किन परिस्थितियों और किस कानूनी आधार पर।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रायल तय समय-सीमा में पूरा होता है, तो इस मामले में अगले साल जनवरी तक फैसला आ सकता है। दैनिक भास्कर ने इन कानूनी पहलुओं पर लीगल एक्सपर्ट एडवोकेट आशीष एस. शर्मा से बातचीत की है।

एडवोकेट आशीष शर्मा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को पारित आदेश में सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो प्रमुख शर्तें तय की थीं। पहली शर्त थी कि आदेश की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर सोनम को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना होगा। दूसरी शर्त यह थी कि यदि छह माह के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता, गवाहों की नियमित सुनवाई नहीं होती या ट्रायल पूरा नहीं हो पाता, तो सोनम को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।

आशीष शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं भी यह नहीं लिखा कि छह माह की अवधि सरेंडर की तारीख से गिनी जाएगी। उनके कानूनी विश्लेषण से स्पष्ट है कि यह अवधि 23 जुलाई को पारित आदेश से प्रभावी मानी जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की छह माह वाली शर्त केवल ट्रायल में देरी के आधार पर दोबारा जमानत मांगने की छूट से संबंधित है। यदि इस बीच कोई नया कानूनी आधार सामने आता है, तो छह माह पूरे होने का इंतजार किए बिना भी नई जमानत याचिका दायर की जा सकती है।

एडवोकेट शर्मा के मुताबिक, यदि ट्रायल के दौरान आरोपी की गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य से जुड़ी नई परिस्थितियां सामने आती हैं, गवाहों की जिरह के दौरान ऐसा नया तथ्य सामने आता है जिससे मामले की कानूनी स्थिति प्रभावित होती हो, या कोई अन्य नया और वैध कानूनी आधार बनता है, तो ऐसी स्थिति में छह माह पूरे होने से पहले भी जमानत याचिका दाखिल की जा सकती है।

अभियोजन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में जुटाए गए साक्ष्य अदालत में विधिवत साबित हो जाते हैं, तो मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने में परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभियोजन को अदालत में यह साबित करना होगा कि सभी परिस्थितियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और उनकी पूरी श्रृंखला केवल आरोपियों की ओर ही इशारा करती है। यदि परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की यह चेन संदेह से परे सिद्ध हो जाती है, तो यही साक्ष्य सोनम रघुवंशी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध कर कठोर सजा का आधार बन सकते हैं।