नीट-यूजी पेपर लीक मामले में राउज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में 13 आरोपियों पर आज से दलीलें शुरू होने की संभावना है, अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। झारखंड भर्ती घोटाले में करीब 150 लोग ईडी की जांच के दायरे में हैं। जस्टिस यशवंत वर्मा पर संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रक्रिया पर विचार हो रहा है। हरिद्वार से लौटे दिव्यांग दंपती के चार बच्चों की स्कूल फीस माफ कर दी गई है। गूगल ने अपनी नई पिक्सल 11 सीरीज लॉन्च की है। दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के आसपास बारिश के आसार हैं और चीनी मांझे की गुपचुप बिक्री भी सामने आई है।
ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने डबरा में अवैध खनन और खनिज परिवहन के मामले में सरकार द्वारा अपनाए जा रहे उपायों पर सवाल उठाए। न्यायालय ने सीसीटीवी निगरानी और ट्रक नंबर प्लेट बदलने की स्थिति में पहचान पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ट्रकों की बॉडी और कांच पर बड़े अक्षरों में नंबर अंकित किए जाएं। पिछली सुनवाई में अशोक सिंह यादव की खदानों में खनन गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी और रिकॉर्ड छिपाने पर सवाल उठे थे। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी, जिसमें कलेक्टर को उपस्थित रहना होगा और ड्रोन फुटेज की समीक्षा की जाएगी।
जबलपुर हाई कोर्ट ने दमोह नगर पालिका द्वारा शहरी क्षेत्र में स्लाटर हाउस पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका निरस्त कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बताया कि इसी विषय से संबंधित याचिका पहले से हाई कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नई याचिका दाखिल करने के बजाय लंबित प्रकरण में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। यह याचिका दमोह के कसाई मंडी क्षेत्र के निवासियों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें नगर पालिका के 29 अप्रैल 2026 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सौतेला बेटा भी किराएदारी कानून के तहत बेटे की श्रेणी में आता है। यदि उसके कारोबार के लिए दुकान की वास्तविक जरूरत है, तो मां किराएदार से दुकान खाली करा सकती है। यह निर्णय 21 साल पुराने किराएदारी विवाद में आया, जिसमें जस्टिस आशीष श्रोती ने निचली अपीलीय अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली मंजिल की जगह को भूतल की दुकान का समान विकल्प नहीं माना जा सकता।
मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में 8 और 9 अगस्त को इंदौर में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 50 से अधिक न्यायाधीश न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर मंथन कर रहे हैं। 16 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग 4.90 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें 24,938 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। हाई कोर्ट में 53 स्वीकृत न्यायाधीश पदों में से लगभग 11 पद खाली हैं। सम्मेलन में तकनीक और सुधारों के साथ-साथ न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों के वास्तविक अनुपात पर विचार की उम्मीद है ताकि न्यायपालिका को आधुनिक और पर्याप्त बनाया जा सके।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकारी स्कूलों के लिए 350 करोड़ रुपये के यूनिफॉर्म टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि जवाब दाखिल होने तक टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित तीन संगठनों ने मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा 3 जून, 2026 को जारी टेंडर को चुनौती दी है, इसे 2023 के भंडार क्रय नियमों के विपरीत बताया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इससे लगभग दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में 8 और 9 अगस्त को दो दिवसीय पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘एन्हांसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ है। भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत इसका उद्घाटन करेंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आरके चौबे की एकलपीठ ने कहा कि जमानत देने और रद्द करने की प्रक्रियाएं भिन्न हैं तथा पूर्व में दी गई राहत वापस लेने के लिए अत्यंत ठोस और असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं। नर्मदापुरम निवासी सचिन ठाकुर ने राकेश रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती।
देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इंदौर में नेशनल लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (नालसा) की वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस में न्याय तक प्रभावी पहुंच के लिए संवाद, गरिमा और समावेशन को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनना और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराना भी है। सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय को नागरिकों तक पहुंचना चाहिए, न कि उन्हें न्याय तक पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़े। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कानूनी समाधान प्रदान करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
इंदौर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 9 अगस्त को बच्चों और बंदियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों पर मंथन हुआ। दो तकनीकी सत्रों में बाल हितैषी न्याय व्यवस्था, बच्चों के संरक्षण एवं पुनर्वास, तथा बंदियों व उनके परिवारों के पुनर्समावेशन और न्याय तक पहुंच पर चर्चा की गई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस विक्रम नाथ ने सत्रों की अध्यक्षता की। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केवल कानून बनाने से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि न्याय व्यवस्था और जनता के बीच दूरी कम होनी चाहिए।