मध्य प्रदेश सरकार ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का निर्णय लिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। अब इस मामले को अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को इस मामले की सुनवाई है, जहां सरकार शपथ पत्र देगी। शाह ने 11 मई 2025 को यह बयान दिया था, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज हुई और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच हुई।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल नवाचार किए हैं। ई-कोर्ट सेवाओं के माध्यम से पक्षकार अब घर बैठे अपने प्रकरण की स्थिति देख सकते हैं, जिससे कोर्ट आने-जाने का समय और खर्च कम हुआ है। जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। हाई कोर्ट और जिला न्यायालयों में ई-सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो अधिवक्ताओं और पक्षकारों को ई-फाइलिंग तथा अन्य आनलाइन न्यायिक सेवाओं में सहायता प्रदान करते हैं।
झाबुआ के पेटलावद क्षेत्र से जुड़े 2934 करोड़ रुपये के कथित साइबर फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पेटलावद के रूपगढ़ निवासी सह-आरोपी विनोद कुमार राठौर को 22 अगस्त को गिरफ्तार किया। यह फर्जीवाड़ा शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर किया जा रहा था। मुख्य आरोपी अनुराग अरविंद श्रीवास्तव को 31 जुलाई 2026 को नागपुर से पकड़ा गया था। इस गिरोह ने फर्जी स्क्रीनशॉट और ‘एसीआई सेंचुरी’ ऐप का उपयोग कर निवेशकों को धोखा दिया। जांच में दो करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं और 3087 ऑनलाइन शिकायतें सामने आई हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। 31 अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाएगी और मंजूरी मिलने पर अधिसूचना जारी होगी। जस्टिस कोगजे वर्तमान में गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश हैं, जिन्हें 2016 में अतिरिक्त और 2018 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को नया न्यायिक नेतृत्व मिलेगा।
मध्य प्रदेश सरकार कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मंत्री विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देगी। गृह विभाग इस संबंध में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजेगा। यह निर्णय कैबिनेट की अनुशंसा पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मुहर के बाद लिया गया है। मंत्री शाह ने 11 मई, 2025 को इंदौर के रायकुंडा गांव में यह बयान दिया था, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कैबिनेट ने एकमत से कहा कि शाह चार बार माफी मांग चुके हैं और उनकी मंशा सेना या महिला अधिकारी का अपमान करने की नहीं थी, इसलिए मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियम विरुद्ध संचालित अस्पतालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और बीपी शर्मा की युगलपीठ ने यह आदेश लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कोरोनाकाल में निजी अस्पतालों को नियमों की अनदेखी कर अनुमति देने और लाइसेंस जारी करने में लापरवाही का आरोप है। याचिका लंबित रहते अगस्त 2022 में न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को भी जिम्मेदार पाया गया था। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
आलीराजपुर जिले के सोंडवा थाना क्षेत्र में धर्म परिवर्तन, पहचान छिपाने और धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में फरार चल रहे आरोपी सचिन यादव उर्फ जावेद मंसूरी को धार जिले के डही से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर मकान मालिक की पत्नी को प्रभावित कर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने और मजार पर ले जाने का आरोप है। उसके खिलाफ जान से मारने की धमकी, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धोखाधड़ी सहित मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम तथा एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी की पत्नी आरती अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
देवास में एक सौतेले पिता को अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) ने आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ने वर्षों तक बालिका का यौन शोषण किया, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। पीड़िता ने अपनी मां, ताऊ और ताई से शिकायत की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बालिका के गर्भवती होने पर आस संस्था की मदद से मामला पुलिस तक पहुंचा। बरोठा पुलिस ने सौतेले पिता, माता, ताऊ और ताई के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था, जिसके बाद न्यायालय ने दो वर्ष में प्रकरण का निराकरण कर दोषी को सजा सुनाई।
मध्य प्रदेश में अब छोटे अपराधों पर जेल की बजाय सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी। यह दंड राज्य में पहली बार प्रभावी किया गया है, जिसके लिए गृह विभाग ने अधिसूचना जारी की है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत मानहानि, चोरी और आत्महत्या के प्रयास जैसे अपराधों में दोषी को अस्पताल की सफाई या पौधारोपण जैसे कार्य करने होंगे। सेवा की अवधि 1 से 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक हो सकती है, जिसकी निगरानी जिला परिवीक्षा अधिकारी करेंगे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 35 हजार से अधिक अवमानना प्रकरण लंबित हैं, जिससे लंबित मामलों के निराकरण की चुनौती जटिल हो गई है। आदेशों का पालन न होने पर पक्षकार दोबारा न्यायालय का रुख करते हैं, जिससे अतिरिक्त न्यायिक प्रक्रिया शुरू होती है। मार्च 2025 के अंत तक हाई कोर्ट में 4.71 लाख से अधिक प्रकरण लंबित थे। आदेशों के समय पर पालन न होने से न्यायालय के अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग बढ़ जाती है, जिससे मूल मामलों के निराकरण की गति प्रभावित होती है।