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2026-10-17

विदिशा में इंडियन ऑयल लगाएगा सीबीजी प्लांट, पराली से किसानों की होगी अतिरिक्त आय

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, विदिशा।

जिस नरवाई को किसान फसल कटने के बाद खेत से हटाने के लिए जला देते हैं, वह अब ईंधन का कच्चा माल बनेगी। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) विदिशा जिले में कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट लगाने जा रहा है।

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यह प्लांट मक्का, धान, गेहूं सहित दूसरी फसलों के अवशेषों से सीबीजी बनाने की तैयारी में है। इस प्लांट के शुरू होने के बाद क्षेत्र के किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बन जाएंगे।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर अंशुल गुप्ता और आईओसीएल के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने प्लांट स्थापना से संबंधित आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने बताया कि इसके लिए नटेरन, बासौदा और कुरवाई क्षेत्र में 15 से 20 एकड़ सरकारी जमीन की तलाश की जा रही है। एसडीएम को जमीन चिन्हित करने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह जमीन आईओसीएल को लंबी अवधि के पट्टे पर दी जाएगी।

फसल कटने के बाद खेत में बचने वाले अवशेष किसानों के लिए लंबे समय से परेशानी बने हुए हैं। इन्हें खेत से हटाने में मेहनत और खर्च लगता है, जिससे बचने के लिए अधिकांश किसान इन अवशेषों को खेत में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

अब सीबीजी प्लांट के लिए क्षेत्र से मक्का, धान, गेहूं सहित विभिन्न फसलों के अवशेष एकत्रित किए जाएंगे। इनका उपयोग बायोगैस और अन्य उत्पाद तैयार करने में होगा, जिससे किसानों को फसल की मुख्य उपज के अलावा खेत में बचे अवशेषों से भी आर्थिक लाभ मिलेगा।

पराली जलाने की स्थिति

इस साल देश भर में नरवाई जलाने की 68,259 घटनाएं रिपोर्ट हुईं, जिनमें से 39,165 यानी आधे से अधिक घटनाएं मध्य प्रदेश में दर्ज हुई हैं।

मध्य प्रदेश में भी विदिशा जिला नरवाई जलाने में सबसे आगे रहा है। यहां इस साल 4465 घटनाएं रिकार्ड हो चुकी हैं। पिछले वर्ष भी यहां ऐसी ही स्थिति थी।

कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) क्या है?

कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैविक कचरे या बायोमास से बनाई गई ऐसी गैस है, जिसका मुख्य घटक मीथेन होता है।

इसे सामान्यतः बायोगैस को शुद्ध करके और संपीड़ित यानी कम्प्रेस करके तैयार किया जाता है। गुणवत्ता और उपयोग के लिहाज से यह काफी हद तक सीएनजी की तरह है।

इसका उपयोग वाहनों में, औद्योगिक भट्ठियों में, खाना पकाने में और कुछ संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।

कलेक्टर का वक्तव्य

कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने बताया कि प्लांट की स्थापना से किसानों के लिए नरवाई अब केवल अपशिष्ट नहीं रहेगी, बल्कि उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

इससे नरवाई जलाने की घटनाओं को कम करने, पर्यावरण संरक्षण और किसानों को कृषि अवशेषों का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी। प्लांट की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि चयन एवं अन्य प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जा रहा है।