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2026-08-03

भोपाल में 6 माह में 40 से अधिक मंदिरों में चोरी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

राजधानी भोपाल में चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं बचे हैं। आम लोगों के घरों और दुकानों के बाद अब मंदिर भी चोरों के निशाने पर आ गए हैं। बीते करीब छह महीनों में शहर और देहात क्षेत्र के मंदिरों में 40 से अधिक चोरी की वारदातें दर्ज की जा चुकी हैं।

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इन वारदातों में रात के अंधेरे में ताला तोड़कर चोरी करने से लेकर दिनदहाड़े दर्शनार्थी बनकर चोरी करने तक के मामले शामिल हैं।

पुलिस ने इस दौरान कई शातिर चोरों और दो गिरोहों को पकड़ा भी है, लेकिन मंदिरों में सुरक्षा के अभाव के कारण चोरी की घटनाएं लगातार जारी हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मंदिरों में चोरी करने वाले बदमाश शातिर तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में आरोपी सामान्य श्रद्धालु बनकर मंदिर पहुंचते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और परिसर का जायजा लेते हैं। जैसे ही पुजारी या श्रद्धालुओं की नजर हटती है, वे दानपात्र, भगवान के मुकुट, चांदी के आभूषण, घंटियां और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाते हैं। वहीं, सुनसान इलाकों के मंदिरों को चोर रात में निशाना बनाकर ताले तोड़ देते हैं।

शहर में वारदातों का फैलाव

मंदिरों में चोरी की घटनाएं शहर के किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। गांधीनगर, कटारा हिल्स, शाहपुरा, कोलार, ऐशबाग, बैरागढ़ और देहात समेत कई क्षेत्रों में ऐसी वारदातें सामने आ चुकी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन मंदिरों में नियमित रूप से वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि दर्शन करने पहुंचते हैं, वे भी सुरक्षित नहीं हैं। हाल ही में भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने स्थित मंदिर में भी चोरी की घटना हुई थी। इसके अलावा अरेरा कॉलोनी और कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के मंदिरों में भी वारदातें हुई हैं।

देहात क्षेत्र में सर्वाधिक वारदातें

भोपाल देहात क्षेत्र में पिछले छह महीनों में करीब 15 मंदिर चोरी की घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें से एक सक्रिय गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जो रायसेन से भोपाल आकर मंदिरों को निशाना बनाता था। वहीं, शाहपुरा थाना पुलिस ने हाल ही में एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में कई मंदिरों में चोरी करना स्वीकार किया। इसके बावजूद नई वारदातें लगातार सामने आ रही हैं।

मंदिरों के आसान निशाना बनने के कारण

अधिकांश कॉलोनी और मोहल्लों के मंदिरों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कई मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। रात में चौकीदार या सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था नहीं होती है। दानपात्र और कीमती धार्मिक सामग्री खुले स्थान पर रहती है। मंदिर समितियों के पास सीमित आर्थिक संसाधन होने से सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं हो पाता है। पुलिस गश्त हर मंदिर तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पाती, जिसका फायदा बदमाश उठाते हैं।

सुझाए गए समाधान

चोरी रोकने के लिए सभी मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम अनिवार्य किए जाने चाहिए। मंदिर समितियों को स्थानीय नागरिकों के सहयोग से रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए। संवेदनशील मंदिरों की पुलिस गश्त और बीट व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। मंदिर समितियों और पुलिस के बीच नियमित समन्वय बैठकें होनी चाहिए।

हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना जरूरी है। यदि मंदिर समितियां आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो धर्मप्रेमियों और स्थानीय लोगों को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने पुलिस गश्त बढ़ाने और जनसहयोग से सीसीटीवी कैमरे लगाकर उनकी नियमित निगरानी करने का भी सुझाव दिया।

भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि मंदिरों में चोरी की घटनाओं पर पुलिस पूरी संवेदनशीलता से कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि कई आरोपियों और गिरोहों को गिरफ्तार किया गया है। आगे मंदिर समितियों के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।