बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल पुलिस ने शहर में अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक नई पहल की है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की पहल पर भोपाल की ‘माइक्रो बीट व्यवस्था’ में अब जागरूक और भरोसेमंद नागरिकों को गोपनीय रूप से ‘माइक्रो बीट नागरिक प्रभारी’ बनाया जाएगा।
इस नई व्यवस्था की मुख्य बात यह है कि इन नागरिकों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। ये नागरिक न केवल अपने मोहल्ले या गली में होने वाले अपराध, नशाखोरी और संदिग्ध गतिविधियों की खबर वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे, बल्कि यदि बीट प्रभारी या कोई पुलिसकर्मी लापरवाही बरतता है, तो उसकी शिकायत भी सीधे पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा सकेंगे।
इस व्यवस्था के लागू होने से पुलिस को अपराध घटने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, संभावित खतरे और संदिग्ध हरकतों की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, क्योंकि स्थानीय नागरिक अपने आसपास होने वाली हर गतिविधि से सबसे पहले वाकिफ होते हैं।
नागरिक अपने क्षेत्र में संदिग्धों की आवाजाही, अवैध नशाखोरी, अपराधियों की सक्रियता और ऐसे स्थानीय विवादों की सूचना देंगे जिनसे आगे चलकर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो।
यह व्यवस्था पुलिस के आंतरिक निगरानी तंत्र को काफी मजबूती देगी। यदि नागरिक प्रभारी यह पाते हैं कि उनके इलाके में तैनात बीट प्रभारी या कोई पुलिसकर्मी सूचना मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहा है, तो इसकी रिपोर्ट सीधे पुलिस अधिकारियों को भेजी जा सकेगी। इससे धरातल पर तैनात पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होगी और पुलिस कमिश्नर को वास्तविक स्थिति का सटीक फीडबैक मिलता रहेगा।
चयन प्रक्रिया
भोपाल पुलिस प्रत्येक माइक्रो बीट के लिए साफ-सुथरी छवि, सामाजिक जिम्मेदारी और निष्ठा वाले सम्मानित नागरिकों की सूची तैयार करेगी।
निगरानी व्यवस्था
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी खुद पुलिस कमिश्नर करेंगे। नागरिकों से मिलने वाली सूचनाओं, उन पर पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई और सामने आने वाली शिकायतों की हर महीने समीक्षा की जाएगी।
पुलिस कमिश्नर का बयान
इसे लेकर भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा है कि माइक्रो बीट थाना क्षेत्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पुलिसिंग इकाई है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक माइक्रो बीट से समय पर सटीक जानकारी मिलने पर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है और इसी उद्देश्य से नागरिकों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।

