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2026-08-14

रायसेन के पिपलिया खुर्द में श्मशान घाट की कमी, बारिश में तिरपाल के नीचे हुआ अंतिम संस्कार

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, रायसेन।

रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के ग्राम पिपलिया खुर्द में मूसलाधार बारिश और कीचड़ से लथपथ रास्तों के बीच एक घटना सामने आई है। गांव में श्मशान घाट न होने के कारण ग्रामीणों को बरसते पानी में तिरपाल और छातों के सहारे एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, पिपलिया खुर्द निवासी 75 वर्षीय काशी बाई का सोमवार रात निधन हो गया था। मंगलवार सुबह से इलाके में तेज बारिश हो रही थी, जिसके कारण परिवार और ग्रामीणों के सामने शव के अंतिम संस्कार को लेकर दुविधा उत्पन्न हो गई।

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पास में कोई पक्का स्थान न होने के कारण ग्रामीणों ने खेत के किनारे खुले स्थान पर तिरपाल बांधा और छाते लगाए। इसी व्यवस्था के तहत अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। बारिश के कारण लकड़ियां भी गीली हो गईं, जिससे अंतिम संस्कार में काफी देर लगी।

ग्रामीणों की शिकायतें

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हर बार बारिश या धूप में इसी तरह खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इस परेशानी से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी गुजरना पड़ता है।

पिपलिया खुर्द बेगमगंज विधानसभा क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में 20 साल से अधिक समय से एक ही सरकार है और क्षेत्र से पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं, फिर भी गांव में आज तक श्मशान घाट, शेड या पक्का रास्ता नहीं बन पाया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जीते जी उन्हें सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और मरने के बाद भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार की जगह उपलब्ध नहीं है। उनकी मांग है कि हर गांव में कम से कम एक श्मशान घाट, चारदीवारी और शेड अवश्य बनना चाहिए।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया एवं व्यापक स्थिति

इस घटना के बाद गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कहा है कि विकास के दावों के बावजूद गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।

बेगमगंज एसडीएम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व और पंचायत विभाग की टीम को गांव भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों से चर्चा कर श्मशान घाट के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पिपलिया खुर्द की यह घटना अकेली नहीं है। रायसेन जिले के कई गांवों में आज भी श्मशान की पक्की व्यवस्था नहीं है। बरसात में कीचड़, गर्मी में धूप और ठंड में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है।