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2026-10-17

भोपाल के व्यापारियों ने यूपीआई पर एमडीआर के खिलाफ किया प्रदर्शन

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

राजधानी के प्रमुख बाजारों में बुधवार को डिजिटल लेन-देन आम दिनों की तुलना में काफी कम रहा। दुकानों पर पहुंचे खरीदारों से व्यापारियों ने यूपीआई के बजाय नकद, आईएमपीएस या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान करने का आग्रह किया। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले के विरोध में भोपाल के व्यापारी एकजुट हुए। शहर के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने ‘नो-यूपीआई डे’ मनाया। व्यापारियों ने दुकानों पर लगे क्यूआर कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर सांकेतिक विरोध किया। चौक बाजार में व्यापारियों ने यूपीआई का प्रतीकात्मक पुतला बनाकर ‘ऑनलाइन, नो लाइन’ के नारे लगाए और प्रदर्शन किया। न्यू मार्केट, चौक बाजार, 10 नंबर और बैरागढ़ जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानदारों ने ग्राहकों को वैकल्पिक भुगतान माध्यमों के लिए प्रेरित किया। सराफा, कपड़ा और थोक किराना कारोबारियों ने नकद, नेट बैंकिंग और अन्य माध्यमों से लेन-देन कराया। भोपाल सराफा महासंघ के अनुसार, सामान्य दिनों में जहां यूपीआई से 12 से 15 लाख रुपये का लेन-देन होता था, वहीं बुधवार को ग्राहकों ने वैकल्पिक माध्यमों से करीब 8 से 10 लाख रुपये का कारोबार किया। थोक कपड़ा बाजार में लगभग 1 करोड़ रुपये का भुगतान आरटीजीएस और नेट बैंकिंग के जरिए निपटाया गया। इंदौर में भी क्यूआर कोड पर काला कपड़ा ढंककर एमडीआर के विरोध में व्यापारी उतरे।

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व्यापारियों की मांगें और प्रतिक्रिया

भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने सरकार से एमडीआर व्यवस्था तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के लिए पूर्ववत जीरो-एमडीआर व्यवस्था बहाल रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने एनपीसीआई, बैंकों और व्यापारिक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाकर समाधान निकालने की अपील की। भोपाल सराफा महासंघ के संगठन मंत्री नवनीत अग्रवाल ने बताया कि सामान्य दिनों में 12 से 15 लाख का भुगतान यूपीआई से होता है, जबकि ‘नो-यूपीआई डे’ के दौरान ग्राहकों ने सहयोग किया और करीब 8 से 10 लाख का लेन-देन नकद व अन्य बैंकिंग माध्यमों से हुआ। चौक बाजार व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष अभिषेक जैन ने कहा कि चौक बाजार की दुकानों में क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधकर विरोध जताया गया। उन्होंने बताया कि कपड़ा बाजार में करीब 1 करोड़ का भुगतान आरटीजीएस और नेट बैंकिंग से हुआ और सरकार को यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए। न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ के उपाध्यक्ष संजय बलेचा ने कहा कि इस नियम से छोटे दुकानदारों पर हर महीने 1500 से दो हजार और सालाना करीब 25 हजार रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इससे नकद की मांग बढ़ेगी और डिजिटल इंडिया अभियान प्रभावित होगा। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि थोक किराना में 90 प्रतिशत से ज्यादा सौदे दो हजार रुपये से ऊपर के होते हैं। उन्होंने कहा कि किराना कारोबार में मुनाफा ही महज एक प्रतिशत के आसपास रहता है, ऐसे में 0.4 प्रतिशत चार्ज लगने से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। भोपाल व्यापारी महासंघ के संयोजक राकेश अग्रवाल ने कहा कि जिस तरह भारी शुल्कों के चलते एटीएम का उपयोग घटा, ठीक उसी तरह यूपीआई भी चलन से बाहर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि व्यापारियों पर यह अतिरिक्त आर्थिक मार किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

कैट का सांकेतिक विरोध

यूपीआई पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भोपाल ने ‘नो-यूपीआई डे’ मनाते हुए प्रतिष्ठानों पर क्यूआर कोड का सांकेतिक ब्लैकआउट किया। कैट जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि व्यापारी यूपीआई नहीं बल्कि उस पर थोपी जा रही लागत एमडीआर के खिलाफ हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जब व्यापारियों को छूट नहीं मिल रही, तो इसे डिस्काउंट के बजाय ‘मर्चेंट टैक्स रेट’ कहना चाहिए। शर्मा ने कहा कि डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्राविधान न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं निकला, तो यह 60 सेकंड का ब्लैकआउट आगे 60 दिनों के आंदोलन में बदल सकता है।