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मुख्यमंत्री ने बुनकरों, शिल्पकारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए ऑनलाइन पोर्टल किए लॉन्च

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुनकर और शिल्पी सम्मेलन में ‘द मृगनयनी डॉट काम’ और ‘ओडीओपी मार्ट मध्यप्रदेश’ पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इन पोर्टलों के माध्यम से बुनकरों और शिल्पकारों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा, जिससे युवा घर बैठे ऑनलाइन खरीददारी कर सकेंगे और प्रदेश को आर्थिक रूप से बड़ी छलांग मिलेगी। मुख्यमंत्री ने धार में पीएम मित्रा पार्क से तीन लाख रोजगार, इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन से रोजगार वृद्धि और उज्जैन में देश के सबसे बड़े यूनिटी मॉल के निर्माण की बात भी कही। उन्होंने कबीर बुनकर और राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार विजेताओं को भी सम्मानित किया।

यूपीआई भुगतान पर कर प्रस्ताव से खुदरा बाजार चिंतित, थोक बाजार को नकदी बढ़ने की उम्मीद

सरकार के यूपीआई भुगतान पर कर लगाने के प्रस्ताव से खुदरा बाजार और व्यापारियों में चिंता है। उनका मानना है कि त्योहारों से पहले यह नियम लागू होने पर बिक्री प्रभावित होगी। हालांकि, थोक बाजार इसे नकदी व्यापार बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहा है। वित्त विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति घटाएगा और यूपीआई का उपयोग कम करेगा, जिससे ऑनलाइन खरीदारी भी प्रभावित होगी। व्यापारियों का कहना है कि इससे उनकी व्यावसायिक लागत बढ़ेगी और अंततः बोझ उपभोक्ताओं पर ही आएगा।

मध्य प्रदेश में अब सीबीडीसी के माध्यम से डिजिटल टोकन से मिलेगा राशन

मध्य प्रदेश सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लागू कर रही है, जिसके तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के पात्र हितग्राहियों को भारतीय रिजर्व बैंक की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के माध्यम से खाद्यान्न मिलेगा। यह व्यवस्था दिसंबर तक भोपाल और इंदौर की सभी उचित मूल्य दुकानों पर लागू करने का लक्ष्य है। लाभार्थी पीएनबी डिजिटल रुपये ऐप के जरिए डिजिटल टोकन का उपयोग करके राशन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे सब्सिडी के दुरुपयोग और पीडीएस में गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।

भोपाल के 731 गांवों के 1954 से अब तक के 72 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड होंगे ऑनलाइन

भोपाल जिले के 731 गांवों के वर्ष 1954 से अब तक के 72 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड अगले तीन महीने में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। खसरा, खतौनी और नामांतरण जैसे दस्तावेज भू-अभिलेख पोर्टल पर देखे और डाउनलोड किए जा सकेंगे। यह पहल पुराने राजस्व अभिलेखों के खराब होने और उन्हें प्राप्त करने में लगने वाले लंबे समय की समस्या का समाधान करेगी। जुलाई से शुरू हुए डिजिटलीकरण अभियान के तीसरे चरण में आठ लाख पेज स्कैन किए जाएंगे, जिसके बाद पटवारियों द्वारा ऑनलाइन सत्यापन होगा। यह प्रक्रिया नागरिकों और राजस्व अधिकारियों दोनों के लिए दस्तावेजों तक पहुंच को तेज और पारदर्शी बनाएगी।

भोपाल और 731 गांवों के भू-अभिलेख तीन माह में होंगे डिजिटल

भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में 37 लाख छात्रों की ‘अपार ID’ नहीं बन पाई

मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की ‘अपार ID’ योजना धीमी गति से चल रही है, जिसके कारण लगभग 37 लाख (30%) छात्र अभी भी डिजिटल पहचान से वंचित हैं। प्रदेश के कुल 1.40 करोड़ छात्रों में से केवल 1.03 करोड़ का ही पंजीकरण हो पाया है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर इस अभियान में पिछड़ गए, जबकि डिंडौरी, मंडला और उज्जैन जैसे छोटे जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया। आधार संबंधी विसंगतियां, नाम की अशुद्धियां और अभिभावकों की सहमति न मिलना पंजीकरण में मुख्य बाधाएं हैं। यह आईडी शैक्षिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखती है और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में सहायक है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: स्कूलों द्वारा APAAR ID बनाना प्रतिबंधित, माता-पिता की सहमति अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्कूलों को माता-पिता की सहमति के बिना बच्चों की आईडी बनाने से प्रतिबंधित किया गया है। यह निर्णय भुवनेश्वर के माता-पिता द्वारा ओडिशा हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद आया, जिन्होंने सहमति पत्र में इंकार का विकल्प न होने पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है और माता-पिता को सहमति देने या न देने का अधिकार है। याचिका में यह भी मांग की गई कि आईडी न बनवाने वाले छात्रों को किसी भी शैक्षणिक सुविधा से वंचित न किया जाए।