बुलंद सोच, नई दिल्ली।
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं माना जा रहा है। इस परिणाम का सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ा, किंतु राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव अत्यंत अहम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इसे भाजपा की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माना गया। दूसरी ओर, कांग्रेस भी ऐसे माहौल में चुनाव लड़ रही थी, जहां प्रचार समाप्त होने से एक दिन पहले ही पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की प्राथमिक सदस्यता निलंबित करनी पड़ी थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा पूरी ताकत लगाने के बाद भी सीट नहीं बचा सकी।
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना पड़ा भारी
करीब तीन दशक तक दतिया की राजनीति में प्रभाव रखने वाले पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह भाजपा ने पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के इस फैसले के बाद समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने आई। इस दौरान विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया। हालांकि, डॉ. मिश्रा ने बाद में कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील की और पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार भी किया, लेकिन नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
भितरघात की चर्चाओं ने बढ़ाई मुश्किलें
चुनाव के दौरान भाजपा के भीतर भितरघात की चर्चाएं लगातार होती रहीं। पार्टी के पास भी ऐसी सूचनाएं पहुंचने की बात कही जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंदरूनी असंतोष ने चुनावी परिणाम को प्रभावित किया और इसका सीधा असर भाजपा के प्रदर्शन पर पड़ा।
बड़े नेताओं का प्रचार भी बेअसर
दतिया सीट जीतने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ लगभग 10 मंत्रियों ने प्रचार किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी लगातार चुनावी मैदान में सक्रिय रहे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं हो सकी।
कांग्रेस की स्थानीय और जातीय रणनीति सफल
कांग्रेस ने चुनाव में स्थानीय मुद्दों और जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। पार्टी की यह रणनीति जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित हुई। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह प्रचार के अंतिम दिन तक सक्रिय रहे। वहीं, संगठन ने स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाई, जिसका लाभ उसे परिणाम में मिला।
दतिया में भाजपा की लगातार दूसरी हार
यह लगातार दूसरी बार है जब दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। अब उपचुनाव में भी भाजपा इस सीट को वापस हासिल नहीं कर सकी। इस परिणाम से सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी थी। जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाकर नेतृत्व परिवर्तन का संदेश दिया गया। संगठन सृजन अभियान भी चलाया गया। चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की प्राथमिक सदस्यता निलंबित किए जाने के बावजूद कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही। इस परिणाम से पार्टी का मनोबल बढ़ा है।
समीक्षा बैठक का आयोजन
दतिया उपचुनाव में मिली हार पर आज भोपाल में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में समीक्षा बैठक होगी।

