मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने वार्ड 60 की पार्षद सुनेहरा अंसाफ अंी का निर्वाचन शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के 17 जुलाई 2026 के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा पर भी रोक लगाई। सुनेहरा अंी ने 2022 के नगर निगम चुनाव में लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी, जिसे इफ्तेखार (मुन्ना) अंी ने गलत नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने और भ्रामक प्रचार के आरोपों के साथ चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अंी के अंतरिम आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि बिना व्यक्तिगत गलती के निर्वाचित प्रतिनिधि को हटाना मतदाताओं के साथ अन्याय है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठन और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों के बीच विवाद निर्णायक दौर में पहुंच गया है। चुनाव आयोग आज, 17 सितंबर को नई दिल्ली में दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई करेगा। ऋतब्रत गुट दोपहर तीन बजे और ममता गुट शाम चार बजे आयोग के सामने पेश होगा। यह सुनवाई नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनावों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तय होगा कि कौन सा गुट ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न का उपयोग करेगा या आयोग इसे रोक देगा।
मध्य प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय उपचुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। शनिवार सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हुई। आगर-मालवा की सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रदीप सोनी ने कांग्रेस के विष्णु पाटीदार को 960 मतों से हराकर जीत हासिल की। राजनगर की सीलोन पंचायत में भी भाजपा समर्थित रामसखी पटेल विजयी रहीं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पंचायत उपचुनाव के परिणाम जारी किए गए, जिनमें कई भाजपा और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को सफलता मिली। कुल 103 पदों के लिए मतदान हुआ था।
आगर-मालवा की सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भाजपा के प्रदीप सोनी ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के विष्णु पाटीदार को सीधे मुकाबले में 960 मतों से हराया। प्रदीप सोनी को 5663 वोट मिले, जबकि विष्णु पाटीदार को 4703 और नोटा को 149 वोट प्राप्त हुए। कुल 13843 मतों में से 10515 मतदाताओं ने मतदान किया था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी बधाई दी। मतगणना के दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
आज तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में छह सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हो रहे हैं। इनमें असम की नगांव लोकसभा सीट और पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व पुदुचेरी की पांच विधानसभा सीटें शामिल हैं। नंदीग्राम, रेजीनगर, मदुरंतकम, धारापुरम और थट्टांचावडी सीटों पर विभिन्न कारणों से उपचुनाव हो रहे हैं, जैसे इस्तीफे या मुख्यमंत्री द्वारा सीट छोड़ना। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नगांव को भाजपा का पारंपरिक गढ़ न बताते हुए अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या पर प्रकाश डाला। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
ब्रिटेन के क्लैक्टन-ऑन-सी संसदीय उपचुनाव में भारतीय मूल के उद्यमी केतनकुमार पिपलिया, रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता नाइजेल फराज को चुनौती दे रहे हैं। इस चुनाव में कुल 34 उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्तारूढ़ लेबर और विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया है, जिसे उन्होंने ‘फर्जी उपचुनाव’ बताया है। पिपलिया स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने, नियंत्रित सीमाओं और निष्पक्ष आव्रजन व्यवस्था की वकालत करते हैं। फराज पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी हैं, जिनकी जांच चल रही है। यह चुनाव फराज के राजनीतिक प्रभाव और नए उम्मीदवारों के लिए अपनी जगह बनाने की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह ने ग्वालियर रेंज के डीआईजी असित यादव और जिला पंचायत दतिया के सीईओ अक्षय तेम्रवाल पर चुनाव प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक ने कहा कि डीआईजी यादव को चुनाव के दौरान विशेष व्यवस्था करने की खुली छूट दी गई थी और 15-20 बूथों पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी मयूर खंडेलवाल ने निष्पक्षता से चुनाव कराया और अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी। विधायक ने नए थाना प्रभारियों और टीआई पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थक होने का भी आरोप लगाया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद आज भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक दोपहर 12 बजे से पीसीसी के तीसरे तल पर होगी। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित 25 नेता शामिल होंगे। जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह उनके कार्यकाल की पहली पीएसी बैठक है, जिसमें नकुल नाथ पहली बार शामिल होंगे।
दतिया भाजपा में विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद संगठनात्मक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। पार्टी ने जिला कार्यकारिणी भंग कर दी है और नए जिलाध्यक्ष के चयन पर मंथन कर रही है। आशुतोष तिवारी और घनश्याम पिरोनिया प्रमुख दावेदार हैं, जिनके सामने 2028 के विधानसभा चुनाव में टिकट की चुनौती भी है। पार्टी नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को महत्वपूर्ण पदों से दूर रखने की रणनीति पर विचार कर रही है, साथ ही ब्राह्मण, व्यापारी, दलित और कुशवाह जैसे सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही है। आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा की चुनावी रणनीति की कमियों को उजागर किया है। पार्टी ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के लिए बड़े नेताओं और मंत्रियों को मैदान में उतारा, लेकिन इसके बावजूद छह में से केवल दो मंडलों में ही बढ़त बना सकी, जबकि चार मंडलों में कांग्रेस आगे रही। नगर मंडल में भाजपा को 5,604 मतों से बड़ी हार मिली। परिणाम संकेत देते हैं कि स्थानीय संगठन की पकड़, बूथ कमेटियों की सक्रियता और स्थानीय मुद्दे बड़े नेताओं की मौजूदगी से अधिक प्रभावी साबित हुए।