दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा के सामने जिले में संगठन का पुनर्गठन और नए जिलाध्यक्ष का चयन बड़ी चुनौती है। पार्टी एक ऐसे नेता की तलाश में है जो पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव का सामना कर सके। आशुतोष तिवारी और पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार हैं। अनुसूचित वर्ग के महत्व को देखते हुए पिरौनिया एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं। इस बीच, मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई संगठनात्मक कार्रवाई से पार्टी में हलचल है, जिस पर प्रदेश नेतृत्व सख्त रुख अपनाए हुए है।
अवधेश नायक को दतिया उपचुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की सहमति से उनके नियुक्ति आदेश जारी किए। नायक 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे, जिसका कारण नरोत्तम मिश्रा से मतभेद बताया जाता है। कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया था। 11 अगस्त को भोपाल में कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक होगी, जिसमें आगामी चुनाव और कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी।
दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने अपनी हार के लिए कांग्रेस के षड्यंत्र को जिम्मेदार ठहराया और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर कहा कि इसका फैसला जांच समिति करेगी। श्री तिवारी ने कहा कि कांग्रेस के षड्यंत्र को पार्टी समझ नहीं पाई। भाजपा ने हार के कारणों की जांच के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और पूर्व संगठन मंत्री अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति गठित की है। समिति की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर दतिया की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हराया था।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा, वरिष्ठ भाजपा नेता, ने दतिया विधानसभा उपचुनाव परिणाम और भाजपा की हार के बाद अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के साथ मनमुटाव और भीतरघात की सोशल मीडिया अफवाहों को पूरी तरह असत्य और निराधार बताया। ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में, डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आशुतोष तिवारी उनके अनुज समान हैं और उनके बीच 25 वर्षों का पारिवारिक व आत्मीय रिश्ता है। उन्होंने अपने समर्थकों से पार्टी की एकजुटता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की, इसे दतिया भाजपा में उपजे असंतोष को शांत करने का प्रयास माना जा रहा है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने जिला कार्यकारिणी भंग कर दी है, जिसमें नरोत्तम मिश्रा समर्थक निशाने पर हैं। भोपाल में मंथन बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कथित भीतरघात के ऑडियो-वीडियो सबूत पेश किए हैं, जिसमें करीब दो दर्जन पार्षदों पर आरोप हैं। भाजपा ने हार की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति हार के कारणों की पड़ताल करेगी और भविष्य के लिए ‘बसई फॉर्मूला’ जैसे स्थानीय नेतृत्व को महत्व देने पर विचार किया जा रहा है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने अपनी जिला कार्यकारिणी भंग कर दी है। इस पर पूर्व विधायक अवधेश नायक ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर निशाना साधा है। नायक ने मिश्रा पर 2018 में पुत्र मोह में उन्हें बदनाम करने और इंदौर में पांच साल तक केस दर्ज करवाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन द्वारा सबूत मांगे जाने पर मिश्रा कोई प्रमाण पेश नहीं कर पाए। नायक ने संगठनात्मक कार्रवाई को भीतरघात करने वालों के लिए कड़ा सबक बताया, हालांकि निजी तौर पर उन्हें खुशी नहीं हुई। उन्होंने दतिया की जनता से आपसी रिश्ते बनाए रखने की अपील की है।
खरगोन दंगा मामले में सत्र न्यायालय द्वारा 11 मुस्लिम आरोपियों को बरी किए जाने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मध्य प्रदेश सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अप्रैल 2022 में रामनवमी हिंसा के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने पांच मुस्लिम बहुल इलाकों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था। रमेश ने इस कार्रवाई को कानून के शासन और संविधान का घोर अपमान बताया, साथ ही प्रभावितों के लिए मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पार्टी की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माना गया। कांग्रेस ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की प्राथमिक सदस्यता निलंबित होने के बावजूद जीत दर्ज की। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना, पार्टी में भितरघात की चर्चाएं और बड़े नेताओं के प्रचार का स्थानीय नाराजगी दूर न कर पाना भाजपा की हार के प्रमुख कारण रहे। वहीं, कांग्रेस की स्थानीय और जातीय रणनीति सफल साबित हुई। यह दतिया सीट पर भाजपा की लगातार दूसरी हार है, जिसकी समीक्षा बैठक आज भोपाल में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होगी।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने परिणामों की विस्तृत समीक्षा करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक होगी। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया था। बैठक में हार के कारणों, प्रत्याशी चयन में बदलाव, स्थानीय असंतोष और भितरघात की आशंकाओं पर गहन चर्चा की जाएगी, साथ ही अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया गया है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आज घोषित होगा, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यह जनादेश भाजपा की नई रणनीति, कांग्रेस की वापसी की संभावनाओं और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक प्रभाव का परीक्षण करेगा। भाजपा ने डॉ. मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उतारा, जिसके बाद भीतरघात की चर्चाएं रहीं। कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा, हालांकि मतदान के बाद पार्टी में अंदरूनी मतभेद सामने आए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कम मतदान और भीतरघात की चर्चाओं ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।