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कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह का आरोप: डीआईजी असित यादव ने दतिया उपचुनाव प्रभावित करने का प्रयास किया

दतिया विधानसभा उपचुनाव में नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह ने ग्वालियर रेंज के डीआईजी असित यादव और जिला पंचायत दतिया के सीईओ अक्षय तेम्रवाल पर चुनाव प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक ने कहा कि डीआईजी यादव को चुनाव के दौरान विशेष व्यवस्था करने की खुली छूट दी गई थी और 15-20 बूथों पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी मयूर खंडेलवाल ने निष्पक्षता से चुनाव कराया और अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी। विधायक ने नए थाना प्रभारियों और टीआई पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थक होने का भी आरोप लगाया।

दतिया में स्कूल खुलने से एक घंटे पहले ढही बाउंड्री वॉल, बड़ा हादसा टला; कार-बाइक क्षतिग्रस्त

दतिया जिले के तलैया मोहल्ले में शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-6 की बाउंड्री वॉल सुबह 7 बजे तेज बारिश के कारण ढह गई। यह हादसा स्कूल खुलने से एक घंटे पहले हुआ, जिससे बड़ा जानमाल का नुकसान टल गया। मलबे में पास खड़ी एक कार और मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हो गईं, साथ ही बिजली का डीपी भी गिर गया। विद्युत विभाग ने तत्काल क्षेत्र की बिजली काटी। स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। इस घटना ने मानसून पूर्व भवनों की सुरक्षा जांच पर सवाल खड़े किए हैं, जिस पर स्थानीय अभिभावकों ने भी चिंता व्यक्त की है।

दतिया भाजपा में नए जिलाध्यक्ष की तलाश तेज, 2028 विधानसभा चुनाव से जुड़ा फैसला

दतिया भाजपा में विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद संगठनात्मक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। पार्टी ने जिला कार्यकारिणी भंग कर दी है और नए जिलाध्यक्ष के चयन पर मंथन कर रही है। आशुतोष तिवारी और घनश्याम पिरोनिया प्रमुख दावेदार हैं, जिनके सामने 2028 के विधानसभा चुनाव में टिकट की चुनौती भी है। पार्टी नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को महत्वपूर्ण पदों से दूर रखने की रणनीति पर विचार कर रही है, साथ ही ब्राह्मण, व्यापारी, दलित और कुशवाह जैसे सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही है। आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती है।

दतिया उपचुनाव: मंत्रियों की तैनाती और जातीय गणित भी भाजपा के काम नहीं आई

दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा की चुनावी रणनीति की कमियों को उजागर किया है। पार्टी ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के लिए बड़े नेताओं और मंत्रियों को मैदान में उतारा, लेकिन इसके बावजूद छह में से केवल दो मंडलों में ही बढ़त बना सकी, जबकि चार मंडलों में कांग्रेस आगे रही। नगर मंडल में भाजपा को 5,604 मतों से बड़ी हार मिली। परिणाम संकेत देते हैं कि स्थानीय संगठन की पकड़, बूथ कमेटियों की सक्रियता और स्थानीय मुद्दे बड़े नेताओं की मौजूदगी से अधिक प्रभावी साबित हुए।

दतिया उपचुनाव हार पर आशुतोष तिवारी बोले, कांग्रेस षड्यंत्र समझ नहीं पाए

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने अपनी हार का कारण कांग्रेस के षड्यंत्र को बताया। उन्होंने भोपाल में कहा कि वे इस षड्यंत्र को समझ नहीं पाए और अन्य कारणों की समीक्षा की जाएगी। तिवारी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर सीधा जवाब देने से बचा और भीतरघात पर समीक्षा की बात कही। उन्होंने पार्टी नेताओं से मुलाकात की और 2028 के चुनाव में खुद को साधारण कार्यकर्ता बताया। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी हार पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपनी रणनीति की गहन समीक्षा करें।

दतिया भाजपा में नए जिलाध्यक्ष की तलाश तेज; आशुतोष तिवारी और घनश्याम पिरौनिया दौड़ में आगे

दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा को जिले में नए सिरे से संगठन की संरचना और जिलाध्यक्ष का चयन करना पड़ रहा है। पार्टी पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव से मुक्त एक मजबूत नेतृत्व की तलाश में है। जिलाध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता आशुतोष तिवारी और पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया के नामों पर विचार किया जा रहा है। तिवारी के पास संगठन को खड़ा करने का अनुभव है, वहीं पिरौनिया अनुसूचित वर्ग के प्रतिनिधित्व के कारण महत्वपूर्ण दावेदार हैं, जिसकी दतिया विधानसभा में 23.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस बीच, डॉ.

दतिया में सिंध नदी उफान पर, सेवढ़ा के ऐतिहासिक छोटे पुल के आधे मेहराब जलमग्न

दतिया में पिछले दो दिनों की लगातार वर्षा से सिंध नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सेवढ़ा का ऐतिहासिक राजाशाही कालीन छोटा पुल जलमग्न हो गया है, जिसके लगभग आधे मेहराब पानी में डूब चुके हैं। नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा से पानी की आवक निरंतर जारी है, जिससे नदी पूरे वेग से बह रही है। यह वर्षों पुराना पुल राजाशाही काल की इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे भीड़ न लगाने और सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि लापरवाही से हादसा हो सकता है। जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संबंधित विभाग अलर्ट पर हैं।

मध्य प्रदेश में 20% कम बारिश दर्ज, 49 जिलों में सामान्य से नीचे आंकड़ा

मध्य प्रदेश में मानसून की कमजोर रफ्तार के कारण बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश के 49 जिलों में सामान्य से नीचे आंकड़ा बना हुआ है। अब तक औसतन 16.8 इंच बारिश हुई है, जबकि 21 इंच होनी चाहिए थी। शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट है, जबकि शेष प्रदेश में हल्की बारिश की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में विशेष रूप से 23 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। जून और जुलाई दोनों में मानसून का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

दतिया उपचुनाव हार के बाद भाजपा में संगठनात्मक चुनौती

दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा के सामने जिले में संगठन का पुनर्गठन और नए जिलाध्यक्ष का चयन बड़ी चुनौती है। पार्टी एक ऐसे नेता की तलाश में है जो पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव का सामना कर सके। आशुतोष तिवारी और पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार हैं। अनुसूचित वर्ग के महत्व को देखते हुए पिरौनिया एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं। इस बीच, मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई संगठनात्मक कार्रवाई से पार्टी में हलचल है, जिस पर प्रदेश नेतृत्व सख्त रुख अपनाए हुए है।

दतिया उपचुनाव में आसपा का मजबूत प्रदर्शन, 2028 में ग्वालियर-चंबल में बड़ी चुनौती का संकेत

दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी (आसपा) के प्रत्याशी दामोदर यादव ने 22,527 वोट प्राप्त कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। उनके प्रदर्शन ने बसपा, कांग्रेस और भाजपा के वोटबैंक को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा 6,016 वोटों से चुनाव हार गई। यह उपचुनाव ग्वालियर-चंबल अंचल में दलित राजनीति में आसपा के संभावित उदय का संकेत देता है, जो 2028 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। 2018 के विधानसभा चुनावों में दलित वोटों के एकतरफा रुख ने इस क्षेत्र के राजनीतिक परिणामों को बदल दिया था, जिससे भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।