बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर में घरेलू गैस सिलिंडर उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी न कराने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत 30 सितंबर तक ई-केवाईसी नहीं करा सकने वाले ऐसे 70 हजार उपभोक्ताओं के कनेक्शन 1 सितंबर से होल्ड कर दिए गए हैं। इन उपभोक्ताओं को अब सिलिंडर की बुकिंग करने की अनुमति नहीं मिलेगी।
इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन के अधिकांश उपभोक्ता प्रभावित
प्रभावित उपभोक्ताओं में से अधिकांश इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन के हैं। यदि ये उपभोक्ता अब ई-केवाईसी कराते भी हैं, तो उनके कनेक्शन को बहाल होने में दो दिन का समय लग सकता है।
वैकल्पिक सिलिंडर की उपलब्धता और मूल्य
इस दौरान तत्काल सिलिंडर की आवश्यकता होने पर उपभोक्ताओं को 10 किलो वाला छोटा सिलिंडर उपलब्ध होगा। यह सिलिंडर गैर-घरेलू श्रेणी में प्राप्त होगा और इसके लिए 1700 रुपये का भुगतान करना होगा।
प्रभावित उपभोक्ताओं की संख्या
जिन उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनमें इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के 52 हजार उपभोक्ता शामिल हैं। तीनों गैस कंपनियों के मिलाकर कुल 70 हजार उपभोक्ताओं के कनेक्शन होल्ड पर हैं।
ई-केवाईसी नियम अनिवार्य
1 अक्टूबर से 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलिंडर के लिए ई-केवाईसी का नियम अनिवार्य कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि जिन उपभोक्ताओं के एलपीजी कनेक्शन की ई-केवाईसी पूरी नहीं होगी, वे 14.2 किलो वाले घरेलू सिलिंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे।
सत्यापन प्रक्रिया और समय-सीमा
ई-केवाईसी के लिए थंब इंप्रेशन से सत्यापन किया जाएगा। ई-केवाईसी को लेकर समय-सीमा को लगातार कई बार बढ़ाया गया था, लेकिन 30 सितंबर की आखिरी तिथि के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया है।
रियायती दर पर सिलेंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया
जिन उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण (ऑथेंटिकेशन) हो चुका है, वे पहले की तरह सब्सिडी वाले रेट पर आसानी से सिलिंडर बुक कर सकेंगे। जिनका प्रमाणीकरण बाकी है, उन्हें रियायती दर पर सिलिंडर पाने के लिए पहले प्रमाणीकरण पूरा करना होगा।
प्रमाणीकरण न कराने वाले ग्राहकों के लिए विकल्प
जो ग्राहक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया नहीं करना चाहते, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे वेबसाइट, मोबाइल ऐप या व्हाट्सएप चैटबॉट पर रजिस्टर कर 5 किग्रा या 10 किग्रा के सिलिंडर बाजार मूल्य पर ले सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य
तेल कंपनियों द्वारा अक्टूबर 2023 से यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि सब्सिडी का लाभ केवल सही और पात्र परिवारों तक पहुंचे, फर्जी या डुप्लीकेट कनेक्शन की पहचान हो सके और घरेलू उपयोग वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की कमर्शियल या इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में होने वाली कालाबाजारी रुक सके।

