बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर शहर में लगभग 75 हजार वाहन ऐसे हैं जिन पर अब तक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं लगी है। इन वाहनों की नंबर प्लेट कैमरा सिस्टम में सर्च नहीं होने के कारण ऑनलाइन चालानी कार्रवाई में परेशानी आ रही है। इसका लाभ उठाकर कुछ वाहन चालक रेड सिग्नल पार करने जैसे यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
एचएसआरपी अनिवार्यता और अनुपालन
परिवहन विभाग के अनुसार, इंदौर जिले में वर्ष 2019 से पहले पंजीकृत 13 लाख से अधिक वाहनों में एचएसआरपी लगाया जाना था। परिवहन विभाग में वाहन ट्रांसफर, रिन्युअल सहित अन्य कामों के दौरान एचएसआरपी अनिवार्य किए जाने से बड़ी संख्या में वाहनों पर प्लेट लग गई। इसके बावजूद, लगभग 75 हजार वाहन अब भी बिना एचएसआरपी के चल रहे हैं। वर्ष 2023 में 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत वाहनों में एचएसआरपी लगाने के निर्देश जारी हुए थे। शुरुआत में सख्ती के बाद प्लेट लगवाने के लिए लंबी वेटिंग हुई, जिसके कारण अंतिम तारीख भी बढ़ानी पड़ी थी। बाद में वाहन पोर्टल पर बिना एचएसआरपी वाले वाहनों के ट्रांसफर सहित अन्य काम रोक दिए गए। इसके बावजूद, सभी वाहनों पर प्लेट नहीं लग सकी, जिसका अर्थ है कि अधिकांश वाहन या तो चलन से बाहर हो गए या उनका पंजीयन रिन्युअल नहीं कराया गया। आरटीओ प्रदीप शर्मा ने बताया कि एचएसआरपी नंबर प्लेट के बाद ही कार्यालय में ट्रांसफर और अन्य आवेदन प्रक्रिया होती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान भी नंबर प्लेट नहीं होने पर कार्रवाई की जाती है।
एचएसआरपी प्रक्रिया का इतिहास
वाहनों में एचएसआरपी लगाने की प्रक्रिया वर्ष 2012 में शुरू हुई थी, जिसके तहत लिंक उत्सव प्रालि को 15 साल का अनुबंध दिया गया था। शिकायतों के बाद वर्ष 2014 में यह अनुबंध निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद कोर्ट प्रकरण के कारण नंबर प्लेट लगाने का काम प्रभावित रहा। 1 अप्रैल 2019 से डीलरों को एचएसआरपी लगाने की जिम्मेदारी दी गई। इस प्रकार, पांच साल तक वाहनों में नंबर प्लेट लगाने का काम प्रभावित रहा था।
एचएसआरपी के लाभ और महत्व
एचएसआरपी वाहन चोरी पर रोक लगाने में मदद करती है, क्योंकि प्लेट को आसानी से निकालकर दूसरे वाहन पर लगाना मुश्किल होता है। यह फर्जी नंबर प्लेट पर अंकुश लगाती है, क्योंकि इसमें छेड़छाड़-रोधी तकनीक होती है जिससे नकली नंबर प्लेट बनाना और बदलना कठिन है। यूनिक नंबर और निर्धारित डिजाइन के कारण सीसीटीवी व ट्रैफिक कैमरों से वाहन की पहचान आसान होती है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन का ई-चालान करना आसान होता है, जिससे ऑनलाइन चालान में सुविधा मिलती है। प्लेट पर लेजर से अंकित 10 अंकों का यूनिक आईडी नंबर होता है, जो वाहन के रिकॉर्ड से जुड़ा रहता है, जिससे एक यूनिक पहचान मिलती है। प्लेट नान-रीयूजेबल स्नैप लॉक से लगती है, जिसे निकालने के बाद दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता, यह छेड़छाड़-रोधी लॉक है। मध्य प्रदेश में अब वाहन ट्रांसफर करना भी आसान हो गया है, क्योंकि एचएसआरपी डेटा नेशनल पोर्टल से लिंक है, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।

