बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में भूमिगत मेट्रो निर्माण के दौरान सुरंग के आसपास के भवनों और जमीन की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जाएगी। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक बनने वाली मेट्रो सुरंग के करीब 30 मीटर दायरे में आने वाले भवनों का पहले विस्तृत सर्वे किया जाएगा। निर्माण के दौरान जमीन या भवन में होने वाले किसी भी बदलाव को सेंसर के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट तैयार होगी। किसी भी तरह के मामूली बदलाव की जानकारी भी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी। मेट्रो परियोजना अब भूमिगत निर्माण के चरण में प्रवेश कर गई है, जिसके तहत एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक बनने वाली मेट्रो सुरंग के आसपास के भवनों और जमीन की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।
मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के दोनों ओर 30 मीटर के दायरे में आने वाले सभी भवनों का निर्माण शुरू होने से पहले विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इस सर्वे में भवनों की मौजूदा स्थिति, दरार, झुकाव और अन्य संरचनात्मक पहलुओं का रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके बाद जमीन और भवनों पर विभिन्न प्रकार के सेंसर स्थापित किए जाएंगे।
ये सेंसर जमीन के खिसकाव, कंपन और भवनों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को लगातार रिकार्ड करेंगे। निर्माण के दौरान यदि कोई भी मामूली बदलाव पाया जाता है तो उसकी तत्काल रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) तकनीक का उपयोग
शहर के घनी आबादी वाले आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से सुरंग गुजरेगी, इसलिए जनसुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मिक्स्ड फेस शील्ड टीबीएम जमीन की सतह से नौ से 28 मीटर नीचे जाकर सुरंग का निर्माण करेगी। सुरंग का व्यास करीब 5.8 मीटर रखा गया है।
मशीन के आगे बढ़ने के साथ ही सुरंग के भीतर प्रीकास्ट आरसी रिंग लगाई जाएंगी, जिससे संरचना को मजबूती मिलेगी। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि टीबीएम तकनीक से सड़क पर यातायात और आम नागरिकों की दैनिक गतिविधियों पर न्यूनतम असर पड़ेगा।
देश के दिल्ली, मुंबई, नागपुर सहित अन्य शहरों में भी इसी तकनीक से भीड़भाड़ वाले इलाकों में सफलतापूर्वक भूमिगत मेट्रो का निर्माण किया जा चुका है। इंदौर में भी इसी मानक के आधार पर काम किया जाएगा ताकि निर्माण के साथ-साथ नागरिक सुविधाएं भी बनी रहें।

